हिमाचल विधानसभा में उठा वन भूमि सीमांकन का 100 साल पुराना विवाद
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने सोमवार को शून्यकाल के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में वन भूमि सीमांकन के लंबे समय से लंबित मुद्दे को उठाया और लगभग एक शताब्दी से चली आ रही देरी की ओर ध्यान आकर्षित किया
1925 से लंबित मामला, लोगों को झेलनी पड़ रही भारी मुश्किलें
- स्पष्ट सीमांकन के अभाव में विकास कार्य ठप
- कांग्रेस विधायक सोलंकी ने सरकार से त्वरित समाधान की मांग की
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने सोमवार को शून्यकाल के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में वन भूमि सीमांकन के लंबे समय से लंबित मुद्दे को उठाया और लगभग एक शताब्दी से चली आ रही देरी की ओर ध्यान आकर्षित किया।
श्री सोलंकी ने कहा कि उनके क्षेत्र में वन भूमि का सीमांकन 1925 से अनसुलझा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग पिछले लगभग 100 वर्षों से इस मामले को निपटाने में विफल रहा है, जिसकी वजह से स्थानीय निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट सीमांकन के अभाव में लोग भूमि स्वामित्व को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं और अपनी संपत्ति का पूर्ण उपयोग करने में असमर्थ हैं। इस अनसुलझे मुद्दे ने क्षेत्र में विकास कार्यों को भी बाधित किया है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और आजीविका दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने सदन में इस मामले को उठाते हुए सरकार से हस्तक्षेप करने और संबंधित विभागों को इस विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने का निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रभावित आबादी को राहत देने के लिए समयबद्ध समाधान आवश्यक है। इस मुद्दे ने भूमि और वन संबंधी विवादों को सुलझाने में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक चूक की ओर ध्यान आकर्षित किया है और सदस्यों को उम्मीद है कि सरकार लोगों की शिकायतों को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई करेगी।