अम्बिकापुर :हाथियों का उत्पात,आधा दर्जन घर तोड़े, लोगों में दहशत
सरगुजा में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी लगातार क्षेत्र में तांडव मचाते हुए ग्रामीणों के घरों को तोड़ रहे हैं जिसे वन विभाग रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही
अम्बिकापुर। सरगुजा में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथी लगातार क्षेत्र में तांडव मचाते हुए ग्रामीणों के घरों को तोड़ रहे हैं जिसे वन विभाग रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है मैनपाट क्षेत्र में पिछले 1 महीने से लगभग 16 हाथियों का दल आतंक मचा रहा है गजदल बीती रात ग्राम सरभंजा व ललैया मैं पुन: धावा बोलकर आधा दर्जन घरों को तोड़ दिया हाथियों द्वारा घर ढह जाने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार बीती रात करीब 9 बजे आधा दर्जन से अधिक जंगली हाथियों के झुंड ने सरभंजा व ललैया ग्राम में पहुँच कर बाल भगवान, बरातू मझवार, उदयनाथ मझवार, उदयनाथ व बुधराम मझवार के घर को तोड़ते हुए घर में रखे अनाज को चट कर गए। गांव में हाथियों द्वारा तबाही मचाये जाने के दौरान ग्रामीण एकजुट होकर मशाल पटाखे ट्रैक्टर की लाइट हाथियों को खदेड़ना शुरू किया। कुछ ही देर में हाथी गांव के बाहर चले गए। हाथी अब तक करीब 40 घरों को छोड़ कर घरों में रखे अनाज को चट कर गए हैं। वन विभाग के द्वारा हाथियों को बस्ती में आने से रोकने के लिए कई प्रयास तो किए जा रहे हैं किंतु विभाग भी सफल नहीं हो पा रहे हैं सुरक्षा के लिहाज से लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है लगातार उन्हें हानि ही पहुंच रही है। यहा बताना लाजमी होगा कि रायगढ़ जिले के कापू वनपरिक्षेत्र में हाथी डटे हुए हैं जो कुछ समय अपने क्षेत्र में रहने के बाद सरगुजा जिले के सीमा से लगे मैनपाट वन परिक्षेत्र में पहुंचकर उत्पात मचाते हैं। बहरहाल देखना होगा कि हाथियों के तांडव को रोकने वन विभाग किस प्रकार कार्य करती है या नाकाम साबित होती है
डीएम ने किया हाथी प्रभावित क्षेत्र का दौरा
हाथी प्रभावित ग्राम सरभंजा व बरिमा के एसडीएम अतुल शेटे द्वारा भ्रमण कर ग्रामीणों को समझाइश दी गई। साथ ही ग्राम पंचायत को प्रभावितों के लिए राहत कैम्प जारी रखने का निर्देश भी दिया। श्री शेटे ने कहा कि सभी प्रभावितों को राहत शिविरों में ही रखा जाए साथ ही उनके भोजन की भी व्यवस्था की जाए। प्रभावितों के हर सम्भव मदद हो। कंही कोई कमी कसर न रहें।इसके बाद ग्राम पंचायत भवन सरभंजा में ग्रामवासियों की बैठक ली गई तथा हाथियों से बचने एवं उनसे दूर रहने की समझाइश दी गई। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बताया कि ग्राम में किसी भी घर में हड़िया या शराब ना बनाएं इससे हाथी ज्यादा आकर्षित होते हैं। श्री शेटे जी ने प्रभावित घरों का भी निरीक्षण किया तथा उनमें रहने वाले लोगों से कहा कि शाम होने पर यह बस्ती में चले जाएं जंगल से लगे हुए घर में नहीं रहे बैठक में तहसीलदार आर एस वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेश्वर नाथ तिवारी, खंड समन्वयक रमेश सिंह, वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री सोनी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। अंबिकापुर, मैनपाट के सरभंजा, ललेया, बरिमा में हाथियों के उत्पात से लोगों का जीना दूभर हो गया है। हाथी अलग-अलग दल में बंटकर उत्पात मचा रहे हैं। बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और ऐसे में हाथियों के उत्पात से बेघर हो रहे ग्रामीणों के समक्ष बड़ी विकट स्थिति निर्मित हो गई है। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि हाथी घरों को तोडऩे के बाद अनाज के बोरे भी चट कर जा रहे हैं। ग्रामीण दहशत में हैं और परेशान भी। वहीं वन अमले के हाथियों को बस्ती की ओर आने से रोकने के सारे उपाय फेल हो रहे हैं। ग्रामीण शाम 4 बजे से ही घर छोड़कर सुरक्षित रहने के जुगाड़ में लगे रहते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि हाथी घर तोड़ रहे हैं लेकिन बाहर रहने से कम से कम उनकी जान तो बचेगी।
शुक्रवार की रात भी हाथियों ने सरभंजा में 5 घर को तहस.नहस कर दिया। अब तक हाथियों ने तीनों गांव को मिलाकर 38 घर तोड़ डाले हैं। गौरतलब है कि काफी दिनों से 11 हाथियों का दल मैनपाट के बरिमा, ललेया व सरभंजा में भ्रमण कर उत्पात मचा रहा है। इस दल में वह हथिनी भी शामिल है, जिसे तीन लाख की लागत का रेडियो कॉलर वन विभाग द्वारा लगाया गया है ताकि उसकी लोकेशन लेकर जन-धन की हानि रोकी जा सके, लेकिन इसका कोई फायदा दिखता नजर नहीं आ रहा है। अभी बीते कुछ दिनों से हाथियों का ये दल बंट गया है और 5 हाथी सरभंजा व ललेया में उत्पात मचा रहे हैं। गुरूवार की रात हाथियों ने ग्राम पंचायत सरभंजा के आश्रित ग्राम ललेया में उत्पात मचाते हुए 6 ग्रामीणों का घर तोड़ डाला था तथा अंदर रखा सारा अनाज भी खा गए थे। हाथियों ने ग्रामीणों को भी दौड़ाया था, बड़ी मुश्किल से भागकर लोगों ने जान बचाई थी। देर रात मशक्कत करने के बाद हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा गया था।
घर, अनाज सब बर्बाद
शुक्रवार की रात 5 हाथियों का दल जंगल की ओर से निकलकर ग्राम सरभंजा में घुस गया। हाथियों के चिंघाड़ की आवाज सुनकर पूरा हाथियों के चिंघाड़ की आवाज सुनकर पूरा गांव बाहर निकल आया। इस बीच हाथियों ने बालभगवान यादव पिता देवनाथ यादव, उदयनाथ पिता ननका मझवार, बराती पिता सनी, बुदराम मोदी पिता धनी व अन्य एक ग्रामीण के घर को तोड़ डाला। साथ ही अंदर रखे अनाज की कई बोरियों को भी खा गए। हाथियों के उत्पात से ग्रामीण पूरी रात दहशत में रहे। अभी भी हाथियों का दल सरभंजा के आसपास जंगल में डेरा जमाए हुए है। वहीं हाथियों के उत्पात से बरिमा, ललेया व सरभंजा में बेघर हुए लोगों के सामने बड़ी विकट स्थिति निर्मित हो गई है। बारिश का मौसम शुरू हो गया है। आशियाना तो उजड़ ही रहा हैए खाने का अनाज भी हाथी खा जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण करें क्या, यह बड़ी समस्या है। सीतापुर विधायक के प्रतिनिधि जिक्की गुप्ता ने मांग की है कि सभी प्रभावितों को राहत कैंप में रखा जाए व जिनके भी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
उनके लिए अलग से आवास की योजना बने।
शाम 4 बजे के बाद छोड़ देते हैं घर
हाथियों के उत्पात का सामना सबसे अधिक जंगल के किनारे बसे लोगों को करना पड़ रहा है। ग्रामीणों में दहशत इतनी है हाथियों के आने के भय से शाम 4 बजे के बाद घर छोड़ किसी और ठिकाने की जुगाड़ में लग जाते हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से कम से कम जान तो बचेगी। इधर वन अमले की सारे उपाए फेल नजर आ रहे हैं। विभाग के अधिकारी ऐसा कोई दिन नहीं होता जो ये दावा न करते हों कि हाथियों को अब रिहायशी क्षेत्र में नहीं आने दिया जाएगा और हर दिन उनके दावों की पोल खुल रही है। योजनाओं के नाम पर सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी हो रही है, प्रभावित क्षेत्र के लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।