चंडीगढ़/भिवानी: हरियाणा में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल यूनिफॉर्म में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें पारंपरिक गांठ वाली टाई (नॉट टाई) की जगह क्लिप-ऑन या वेल्क्रो टाई को अपनाने की सिफारिश की गई है। आयोग का मानना है कि स्कूलों में अनुशासन और ड्रेस कोड जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक जरूरी बच्चों की सुरक्षा है। इसलिए ऐसी यूनिफॉर्म अपनाई जानी चाहिए, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो।
दुर्घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
आयोग के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें स्कूल के बच्चों की टाई खेलते समय झूलों, खेल उपकरणों, दीवारों पर लगे हुक या अन्य वस्तुओं में फंस गई। कुछ मामलों में इससे दम घुटने जैसी गंभीर घटनाएं हुईं और जान तक चली गई। इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए आयोग ने स्कूलों से पारंपरिक टाई की जगह अधिक सुरक्षित विकल्प अपनाने की अपील की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
क्लिप-ऑन और वेल्क्रो टाई क्यों हैं सुरक्षित?
एडवाइजरी में कहा गया है कि क्लिप-ऑन और वेल्क्रो टाई सामान्य खिंचाव पड़ने पर तुरंत अलग हो जाती हैं। यदि किसी खेल गतिविधि या अन्य स्थिति में टाई किसी वस्तु में फंस जाए, तो यह गर्दन पर दबाव बनने से पहले ही निकल जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की टाई बच्चों के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इनमें दम घुटने या गर्दन पर गंभीर चोट लगने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
शिक्षा विभाग से प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने विद्यालय शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी पत्र लिखकर इस एडवाइजरी को राज्य के सभी स्कूलों में प्रभावी रूप से लागू कराने का अनुरोध किया है। आयोग चाहता है कि सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूल इस बदलाव को प्राथमिकता दें और चरणबद्ध तरीके से नई सुरक्षित टाई व्यवस्था लागू करें, ताकि सभी विद्यार्थियों को समान रूप से सुरक्षित वातावरण मिल सके।
नहीं पहननी होगी पारंपरिक टाई
आयोग ने स्कूलों के लिए एक अंतरिम सुझाव भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जब तक सभी विद्यालय क्लिप-ऑन या वेल्क्रो टाई नहीं अपना लेते, तब तक खेलकूद, शारीरिक शिक्षा (पीटी), खेल प्रतियोगिताओं और अन्य जोखिम वाली गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों को पारंपरिक गांठ वाली टाई नहीं पहनाई जानी चाहिए। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को अनावश्यक जोखिम से बचाना और स्कूल परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने कहा कि परंपरा या दिखावे के नाम पर बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, स्कूलों की पहली जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यदि यूनिफॉर्म में एक छोटा-सा बदलाव किसी बड़े हादसे को रोक सकता है, तो सभी विद्यालयों को इसे गंभीरता से अपनाना चाहिए।
स्कूल सुरक्षा पर बढ़ रहा राष्ट्रीय फोकस
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में स्कूल सुरक्षा को लेकर कई नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। भवन सुरक्षा, स्कूल बसों के मानक, सीसीटीवी निगरानी, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों के दौरान सुरक्षा उपायों के साथ अब यूनिफॉर्म से जुड़े सुरक्षा मानकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यूनिफॉर्म, खेल सामग्री और स्कूल परिसर की प्रत्येक व्यवस्था को इसी दृष्टिकोण से तैयार किया जाना चाहिए।
सुरक्षित वातावरण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की यह पहल स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि राज्यभर के विद्यालय इस एडवाइजरी को लागू करते हैं, तो भविष्य में टाई से जुड़े हादसों की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग के अगले कदम और स्कूलों में इस नई व्यवस्था के क्रियान्वयन पर टिकी हैं।