चंडीगढ़: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई जिलों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, करनाल, अंबाला और सोनीपत समेत करीब 15 जिलों से बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ इलाकों में 24 से 28 घंटे तक बिजली गुल रहने का दावा किया जा रहा है। बिजली संकट से घरों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन पर भी असर पड़ा है। यह हड़ताल गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को 25 साल का समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक बुलाई गई है।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने पर विवाद
विवाद की मुख्य वजह हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) का वह फैसला है, जिसके तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत निजी कंपनी को सरकारी वितरण निगम के साथ बिजली वितरण का अधिकार मिल सकता है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि गुरुग्राम जैसे राजस्व देने वाले क्षेत्रों में निजी कंपनी को प्रवेश देने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। कर्मचारियों को आशंका है कि इससे करीब 40 हजार कर्मचारियों के रोजगार पर संकट आएगा और भविष्य में आम उपभोक्ताओं तथा किसानों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
बिजली गुल होने से घरों और उद्योगों पर असर
हड़ताल का असर रिहायशी इलाकों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर बिजली से चलने वाली पानी की मोटरें और पंप बंद होने से लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। गुरुग्राम के दौलताबाद और कादीपुर समेत कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से फैक्ट्रियों के कामकाज पर असर पड़ने की खबरें हैं। एनसीआर के कुछ औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रतिबंधों के कारण जनरेटर के इस्तेमाल पर सीमाएं होने से वैकल्पिक बिजली व्यवस्था भी चुनौती बन गई है। कर्मचारियों की कमी के चलते तकनीकी खराबियों को ठीक करने में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे कारोबार प्रभावित होने और उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
अनिल विज बोले- सरकार कर्मचारियों के साथ
बिजली संकट के बीच हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है और किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला सरकार ने नहीं, बल्कि स्वतंत्र नियामक संस्था HERC ने लिया है। विज के मुताबिक, सरकार इस फैसले को अपीलीय प्राधिकरण APTEL में चुनौती देगी। जरूरत पड़ने पर अदालत से स्थगन आदेश लेने के लिए भी कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। सरकार ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयासों के तहत अधिकारियों की छुट्टियां भी रद्द की हैं।
कांग्रेस ने सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
कुरुक्षेत्र से कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने सरकार से लाइसेंस विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि HERC में नियुक्तियां सरकार करती है, इसलिए इतने बड़े फैसले पर सरकार की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी निजी लाइसेंस के फैसले को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार नियामक आयोग का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। हालांकि, सरकार का कहना है कि फैसले को कानूनी प्रक्रिया के जरिए चुनौती दी जाएगी।
किसान संगठनों ने भी दिया समर्थन
कर्मचारियों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू समेत कई संगठनों का समर्थन मिला है। इन संगठनों ने निजी लाइसेंस वापस लेने की मांग की है। इंडियन नेशनल लोकदल के नेता और पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल विवाद का समाधान कर्मचारियों की मुख्य मांग और सरकार की कानूनी रणनीति पर निर्भर करता है। एक ओर कर्मचारी लाइसेंस रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार बातचीत और कानूनी कार्रवाई के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है। इस बीच बिजली आपूर्ति बहाल करना और आम लोगों को राहत देना राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।