राज्यपाल राज्य सरकार को बहुमत साबित करने का निर्देश दें: भाजपा

शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह और रामपाल सिंह प्रतिनिधिमंडल के रूप में राज्यपाल से मिला और एक पत्र उन्हें सौंपा।

Update: 2020-03-14 18:32 GMT

भोपाल।  मध्यप्रदेश में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां राज्यपाल लालजी टंडन ने मुलाकात कर अनुरोध किया वे राज्य सरकार को बहुमत साबित (फ्लोर टेस्ट) करने के लिए निर्देश दें।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह और रामपाल सिंह प्रतिनिधिमंडल के रूप में राज्यपाल से मिला और एक पत्र उन्हें सौंपा।

मुलाकात के बाद श्री चौहान ने राजभवन के बाहर मीडिया से कहा कि राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि 16 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले ही विशेष सत्र बुलाकर बहुमत साबित करने के लिए राज्य की कमलनाथ सरकार से कहा जाए। श्री चौहान ने दावा करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में हैं और उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है, इसलिए वह तुरंत सदन में बहुमत साबित करे।

श्री चौहान ने कहा कि मौजूदा सरकार 22 विधायकों के त्यागपत्र के कारण बहुमत खो चुकी है। अब उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। एक विशेष सत्र, बजट सत्र (16 मार्च शुरू होने वाले) के पहले ही बुलाया जाए, जिसका विषय सिर्फ बहुमत साबित करने का हो।

राज्यपाल को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि 22 विधायकों ने अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। इन सभी ने राष्ट्रीय मीडिया के समक्ष इस तथ्य की पुष्टि की है। इसमें कहा गया है कि कमलनाथ सरकार ने विधानसभा का विश्वास खो दिया है तथा अब उनके लिए राज्य में संवैधानिक तरीके से सरकार चलाना संभव नहीं है।

सोलह मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र का जिक्र करते हुए पत्र में कहा गया है कि इसे आपने ही (राज्यपाल) बुलाया है। लेकिन मौजूदा तथ्यों एवं संवैधानिक प्रणाली व प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह वर्तमान सरकार का संवैधानिक एवं प्रथम कर्तव्य है कि वह सत्र के पहले ही सबसे पहले अन्य कोई विषय ना लेते हुए अपना बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट कराएं। इसके अतिरिक्त विधानसभा में अन्य किसी भी विषय पर कार्रवाई करना या वर्तमान सरकार का कार्य करते रहना पूर्णत: असंवैधानिक एवं अलोकतांत्रिक होगा।

पत्र में कहा गया है कि श्री कमलनाथ द्वारा सिर्फ 22 विधायकों को ही नहीं बल्कि अन्य विधायकों को भी दबाव में लाने की या लालच देने की निरंतर कोशिश की जा रही हैं। बहुमत परीक्षण को और अधिक लंबित करने से हॉर्स ट्रेडिंग ज्यादा बढ़ेगी। इन बातों का हवाला देते हुए राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि वे संविधान के अनुच्छेद 175 (2) और अन्य प्रावधानों से मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश एवं निर्देश जारी करने करें कि 16 मार्च से पहले ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरकार बहुमत साबित करे। इस विशेष सत्र में विश्वास मत साबित करने के अतिरिक्त और कोई भी विषय नहीं लाया जाए।

पत्र में राज्यपाल से यह भी अनुरोध किया गया है कि विश्वास मत पर मतदान ध्वनि मत से ना होकर डिवीजन (मत विभाजन) एवं बटन दबाकर किया जाए। और सदन की पूरी कार्यवाही की राज्यपाल द्वारा अधिकृत व्यक्ति से वीडियोग्राफी करायी जाए। पत्र के अंत में राज्यपाल से फिर से अनुरोध किया गया है कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संविधान के रक्षक होने के नाते वे (राज्यपाल) तुरंत विश्वास मत हासिल करने संबंधी निर्देश जारी करें।

राज्यपाल से यह भी अनुरोध किया गया है कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी बहाने से अल्पमत की यह सरकार विधानसभा के विश्वास मत की तिथि को ना स्थगित करे और ना ही आगे बढ़ाए।

सदन में 230 सीट हैं, जिनमें से दो जौरा और आगर रिक्त हैं। इस तरह शेष 228 विधायकों में से कांग्रेस के 114 विधायक हैं। इन 114 विधायकों में से 22 कांग्रेस विधायकों ने अपने त्यागपत्र अध्यक्ष को भेज दिए हैं और इन विधायकों को अध्यक्ष ने इस्तीफों की पुष्टि करने के लिए अपने पास बुलाया है। इन 22 कांग्रेस विधायकों में से 19, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक हैं और इनमें से छह मंत्री भी थे, जिन्हें बागी रुख अपनाने के कारण मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बर्खास्त कर दिया है। यदि 22 विधायकों के त्यागपत्र स्वीक़ृत हो जाते हैं तो कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 92 पर आ जाएगी।

दूसरी ओर सदन में भाजपा विधायकों की संख्या 107 है। इसके अलावा बसपा के दो, सपा का एक और चार विधायक निर्दलीय हैं।

संसदीय कार्य मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने आज ही एक न्यूज चैनल से कहा कि सरकार को बहुमत प्राप्त है और वह सदन में साबित कर देगी। लेकिन पहले उन 22 विधायकों को भी बंगलूर से यहां वापस आना चाहिए, जिन्हें भाजपा नेताओं ने बंधक बना लिया है। इन 22 विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने संबंधी मांग पर डॉ सिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर सरकार सभी विधायकों को सुरक्षा देगी, लेकिन वे मध्यप्रदेश में आकर अपनी बात तो रखें। उनका कहना है कि राज्य में शांति व्यवस्था स्थापित है, फिर विधायकों को डरने जैसी क्या बात है।

Full View

Tags:    

Similar News