चैत्र नवरात्र के लिए सजने लगे देवी मंदिर, इस साल जलेगी अधिक जोत

चैत्र नवरात्र को एक सप्ताह शेष होने से देवी मंदिरों में तैयारियां जोरशोर से शुरू हो चुकी है

Update: 2023-03-17 17:37 GMT

रायपुर। चैत्र नवरात्र को एक सप्ताह शेष होने से देवी मंदिरों में तैयारियां जोरशोर से शुरू हो चुकी है। मंदिरों में रंग रोगन किया जा रहा है। महामाया मंदिर में जहां तांबे के कलशों की साफ.सफाई करके चमकाया जा रहा है, जिन्हें एक.दो दिनों बाद क्रमवार सजाया जाएगा। अन्य देवी मंदिरों में भी मिट्टी के कलशों में जोत प्रज्वलित करने तैयारी चल रही है।

जोत प्रज्वलन करने के लिए श्रद्धालु पंजीयन करवाने मंदिर पहुंचरहे हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस साल ज्यादा जोत प्रज्वलन का लक्ष्य रखा गया है। पुरानी बस्ती के ऐतिहासिक महामाया मंदिर के ट्रस्टी व्यासनारायण तिवारी बताते हैं कि मनोकामना जोत के लिए पंजीयन 21 मार्च की रात्रि आठ बजे तक किया जाएगा। गत वर्षों की तरह इस साल भी पंजीयन राशि 701 रुपए रखी गई है। पिछले साल 10 हजार के लगभग जोत प्रज्वलित की गई थी। इस साल 11 हजार जोत प्रज्वलन का लक्ष्य रखा गया है। 

अभिजीत मुहूर्त में प्रज्वलित होगी महाजोत

महामाया मंदिर के पुजारी पं मनोज शुक्ला के अनुसार 21 मार्च को रात्रि 10.52 बजे से प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी और 22 मार्च की रात्रि 8.20 बजे तक रहेगी। उदया तिथि को महत्व दिए जाने के चलते 22 मार्च को नवरात्र का शुभारंभ होगा। जोत प्रज्वलन के लिए सुबह 6.23 से 7.32 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11.05 से 12.35 बजे के मध्य घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है। 

10 देवी मंदिरों में 35 हजार से अधिक जोत

पुरानी बस्ती के महामाया मंदिर के अलावा पुरानी बस्ती के शीतला मंदिरए ब्राह्मणपारा के कंकाली मंदिरए आकाशवाणी तिराहा स्थित काली मंदिरए रावंभाठा स्थित बंजारी मंदिरए कुशालपुर स्थित दंतेश्वरी मंदिर  बंधवापारा के सतबहिनिया माता मंदिर समेत 10 से अधिक देवी मंदिरों में जोत प्रज्वलन के लिए पंजीयन किया जा रहा है। 

अनेक ग्रहों का संयोग

चैत्र नवरात्र पर मकर राशि में शनि और मंगल ग्रह की युति बन रही है। कुंभ राशि में गुरु और शु्क्र ग्रह तथा मीन राशि में सूर्य और बुध ग्रह की युति होने से बुधादित्य योग का संयोग बन रहा है। मेष राशि में चंद्रमा  वृषभ में राहु और वृश्चिक में केतु विराजमान होगा।

रवि पुष्य नक्षत्र

चैत्र नवरात्र के दौरान रविवार को पुष्य नक्षत्र होने से रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसे शुभदायी माना जाता है। पुष्य नक्षत्र के अलावा नवरात्र में सर्वाथिसिद्धि योग  रवि योग का संयोग भी विशेष फलदायी होगा।

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