फिक्स डिपॉजिट की नहीं लौटाई जमा रकम, हर्जाना साथ करनी होगी भरपाई
फिक्स डिपॉजिट योजना के तहत जमा कराई गई रकम के वापस नहीं किए जाने के मामले में उपभोक्ता फोरम द्वारा कंपनी के खिलाफ आदेश पारित किया गया हैं
दुर्ग। फिक्स डिपॉजिट योजना के तहत जमा कराई गई रकम के वापस नहीं किए जाने के मामले में उपभोक्ता फोरम द्वारा कंपनी के खिलाफ आदेश पारित किया गया हैं। फोरम ने नोएडा की जय प्रकाश एसोसिऐटस को जमा रकम को ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया हैं।
साथ ही इससे निवेशक को हुई मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के रुप में 1 लाख रु. अदा करने का निर्देश दिया गया हैं।
उपभोक्ता फोरम में दाखिल प्रकरण के अनुसार मोहन नगर, दुर्ग निवासी राजेश पुरोहित तथा उनकीं पत्नि मंजू परोहित द्वारा नोएडा की कंपनी जय एसोसिएट्स में सावधि योजना के तहत रकम का निवेश किया था। 6 लाख रु. की जमा कराई गई रकम पर त्रिमासिक ब्याज 18 हजाहर 180 रु. प्रदान किए जाने का आश्वासन कंपनी ने दिया था।
5 अगस्त 2013 को जमा किए गए इस फिक्स डिपॉजिट पर कंपनी ने सितंबर 2015 तक नियमित ब्याज का भुगतान किया गया, लेकिन अक्टूबर से दिसंबर 2016 तक की ब्याज राशि का भुगतान नहीं किया गया। नियमित ब्याज प्रदान नहीं किए जाने पर पुरोहित दंपति ने इस फिक्स डिपॉजिट को बंद क मूल रकम की वापसी की मांग की थी।
जिस पर कंपनी ने बकाया ब्याज की रकम अदा कर दी, लेकिन मूल रकम को वापस नहीं किया गया। अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजे जाने के बाद भी समस्या का निराकरण नहीं होने पर प्रकरण को जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
फोरम ने माना व्यवसायिक कदाचरण
प्रकरण जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा जय एसोसिएट्स को नोटिस जारी करने अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया था। कंपनी की ओर से प्रस्तुत जवाब दावा के साथ शपथ पत्र संलग्न नहीं होने के कारण फोरम ने इसे स्वीकार नहीं किया। विचारण के दौरान कंपनी द्वारा समय पर योजना के तहत ब्याज प्रदान नहीं करने और मूल राशि को वापस नहीं किए जाने को उपभोक्ता फोरम ने व्यवसायिक कदाचरण तथा सेवा में कमीं की श्रेणी में माना।
1 लाख का लगाया हर्जाना
जिला उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर ने प्रकरण पर विचारण पश्चात जय एसोसिएट्स कंपनी को एक माह की अवधि में जमा रकम 6 लाख रु. को बकाया ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया हैं। साथ ही इस रकम पर वाद प्रस्तुति से भुगतान तिथि तक 12 प्रतिशत ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति के रुप में 1 लाख रु. तथा वाद व्यय की राशि 10 हजार रु. का भुगतान करने का निर्देश दिया हैं।