स्वतंत्रता दिवस एवं रक्षाबंधन पर हर्षोल्लास का माहौल
स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन लम्बे अन्तराल के बाद एक दिन पड़ने से प्रयागराज में चहुंओर उल्लास और उत्साह का माहौल है।
प्रयागराज । स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन लम्बे अन्तराल के बाद एक दिन पड़ने से प्रयागराज में चहुंओर उल्लास और उत्साह का माहौल है। छोटे बच्चों में गजब का उत्साह नजर आ रहा है।
स्वतंत्रता दिवस पर विभिन्न सरकारी, अर्ध सरकारी कार्यालयों, स्कूल और कॉलेजों में सुबह ध्वजारोहण किया गया। झंडारोहण कर लोगों ने देश की आजादी पर गर्व किया। सबसे अधिक उत्साह स्कूली बच्चों में देखा गया,जिन्होंने प्रभात फेरी निकालकर देश के शहीदों को नमन किया।
सावन शुक्ल पूर्णिमा पर इस बार 19 साल बाद स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का त्यौहार एक साथ पड़ने पर लोगों में दो गुना उत्साह का माहौल देखा गया है। इससे पहले वर्ष 2000 में 15 अगस्त के दिन रक्षाबंधन का पर्व पड़ा था।
सुभाष चौराहे पर अंध विद्यालय के बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। इसमें बैंड बाजे की धुन पर बच्चे देशभक्ति गीत गाते हुए चल रहे थे। सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे से प्रभात फेरी शुरू होकर लोहिया चौराहा होते हुए लोक सेवा आयोग के आगे होमगार्ड कार्यालय पर समाप्त हुई। कलेक्ट्रेट में झंडारोहण के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान किया गया। सुबह शहीद स्मारक यमुना बैंक रोड पर माल्यार्पण किया गया। सभी स्कूल-कॉलेजों में बीएसए एवं जिला विद्यालय निरीक्षक झंडारोहण के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी की देखरेख में प्रात: क्रॉस कंट्री रेस अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा से शुरू होकर बालसन चौराहे पर समाप्त हुई। इसमें सभी आयु वर्ग के लोगों ने प्रतिभाग किया। किसी में जीत और हार की चिंता नहीं थी, बस इसमें शामिल होने का उत्साह था।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार रक्षाबंधन का दिन पूरी तरह भद्रा से मुक्त है। भद्रा एक अशुभ मुहूर्तकाल होता है जो बीते कई सालों से रक्षाबंधन पर पड़ रहा था। लेकिन इस बार भद्रा नहीं होने से कभी भी राखी बांधी जा सकती है। किसी भी शुभ कार्य में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। भद्रा में राखी नहीं बांधी जाती। भद्रा सूर्य की पुत्री हैं और उनका स्वभाव क्रूर है। ब्रह्मा जी ने कालगणना और पंचांग में भद्रा को विशेष स्थान दिया है। भद्रा में शुभ कार्य निषिद्ध हैं।