वीबी-जी राम जी कानून: सभी राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में इस दिन लागू होंगे प्रावधान, सरकार ने बताई तारीख

केंद्रीय सरकार जल्द 2025 के विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम यानी वीबी-जी राम जी कानून को देशभर में लागू करने जा रही है। सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसकी तारीख का एलान भी कर दिया है।;

Update: 2026-05-11 10:28 GMT

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 2025 के वीबी-जी राम जी कानून को लागू करने की घोषणा की है। सरकार ने एक जुलाई 2026 को वह तारीख तय की है, जिस दिन इस कानून के प्रावधान भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होंगे।

कितने दिनों की रोजगार की गारंटी मिलेगी?

इस कानून के तहत हर पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मिलता था। यदि रोजगार मांगने के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार होंगे।

मजदूरी भुगतान और मुआवजे के क्या प्रावधान हैं?

अधिनियम में मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर करने का प्रावधान है। भुगतान सीधे बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी के जरिए किया जाएगा। यदि मजदूरी भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिकों को प्रति दिन बकाया मजदूरी का 0.05 प्रतिशत मुआवजा भी मिलेगा।

डिजिटल उपस्थिति और जॉब कार्ड व्यवस्था

नई व्यवस्था में कार्यस्थलों पर उपस्थिति फेस रिकग्निशन आधारित प्रणाली से दर्ज की जाएगी। हालांकि, नेटवर्क या तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।

ग्राम पंचायतों को मिलेगी अहम जिम्मेदारी

इस अधिनियम में ग्राम पंचायतों को केंद्र में रखा गया है। परिवारों का पंजीकरण, रोजगार आवेदन स्वीकार करना, कार्यों का निष्पादन, रिकॉर्ड संधारण और विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) तैयार करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। ग्राम सभाओं की भागीदारी से स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाई जाएंगी।

इन कार्यों को मिलेगी अनुमति

अधिनियम के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका संबंधी ढांचा और चरम मौसम से बचाव जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों में कार्य किए जा सकेंगे। पीएम आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के कार्यों को भी मजदूरी सहायता के लिए शामिल किया जा सकेगा।

ठेकेदार और भारी मशीनों पर रोक

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अधिनियम के तहत होने वाले कार्यों में ठेकेदारों की अनुमति नहीं होगी। सभी कार्य श्रम आधारित होंगे और ऐसी मशीनों के उपयोग से बचा जाएगा जो मजदूरों के रोजगार को प्रभावित करें।

राज्यों के साथ साझा वित्तीय व्यवस्था

योजना के लिए पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच 90:10 का अनुपात रहेगा, जबकि अन्य राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 60:40 होगा। बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।

पारदर्शिता और सामाजिक निगरानी बढ़ेगी

हर कार्यस्थल पर ‘जनता बोर्ड’ लगाया जाएगा, जिसमें कार्य, लागत और अनुमानित श्रम दिवस की जानकारी दी जाएगी। ग्राम पंचायतों को साप्ताहिक सार्वजनिक बैठकें आयोजित करनी होंगी, ताकि योजना की प्रगति और भुगतान संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंच सके। सरकार का कहना है कि विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण रोजगार सुरक्षा, गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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