H-1B वीजा पर घमासान: जेडी वेंस ने भारतीयों को बताया 'बंधुआ मजदूर', भारत बोला- अपना इतिहास न भूले अमेरिका

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा H-1B वीजा धारकों को 'बंधुआ मजदूर' कहे जाने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा एतराज जताया है। भारत ने इसे औपनिवेशिक मानसिकता और भारतीय पेशेवरों का अपमान बताया है।;

Update: 2026-10-09 10:33 GMT

नई दिल्ली। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों को 'बंधुआ मजदूर' कहे जाने पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने वेंस की टिप्पणी को अनुचित और बेहद अपमानजनक बताते हुए कहा कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल औपनिवेशिक दौर की दर्दनाक यादें ताजा करता है। भारत ने साफ किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास में भारतीय कुशल पेशेवरों का योगदान अतुलनीय है और उनका अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

'भारतीय पेशेवरों का अपमान स्वीकार्य नहीं': विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित और कुशल हैं, जो शोध, नए आविष्कारों और टेक सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मंत्रालय ने याद दिलाया कि अमेरिका का अपना इतिहास प्रवासियों की मेहनत से बना है। ऐसे में प्रवासियों के खिलाफ अपमानजनक और औपनिवेशिक शब्दावली का प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

भारत ने स्पष्ट किया कि कुशल प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के साझा हितों से जुड़ी है, जिससे अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है और नए रोजगार पैदा होते हैं।

जेडी वेंस ने आखिर क्या दिया था बयान?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया था कि विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कामगारों को रख रही हैं। वेंस का दावा था कि H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को समान पद के अमेरिकी नागरिकों की तुलना में 20,000 से 48,000 डॉलर तक कम वेतन दिया जाता है। वेंस ने इसी संदर्भ में वीजा धारकों को 'बंधुआ मजदूर' कहते हुए कंपनियों पर कम वेतन देकर मुनाफा कमाने का आरोप लगाया था।

PERM कार्यक्रम पर निलंबन का H-1B वीजा धारकों पर असर

अमेरिका के श्रम विभाग द्वारा स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) कार्यक्रम को कुछ समय के लिए निलंबित किए जाने पर विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने बताया कि PERM और H-1B वीजा दो अलग व्यवस्थाएं हैं। PERM पर रोक से वर्तमान H-1B वीजा धारकों के वैधानिक दर्जे या उनके आश्रितों (Dependents) पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, इस फैसले से ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) हासिल करने की प्रक्रिया जरूर धीमी हो सकती है।

इंफोसिस और कॉग्निजेंट जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों पर कार्रवाई

अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टीसीएस (TCS), विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी प्रमुख टेक और आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन ने इसके पीछे संघीय जांच का हवाला दिया है, हालांकि जांच प्रक्रियाधीन होने का मतलब यह नहीं है कि ये कंपनियां दोषी साबित हो चुकी हैं।

Tags:    

Similar News