दिवाली तक UPI पर MDR शुल्क टला, दुकानदारों को राहत; जानें किन भुगतानों पर लगेगा चार्ज

: NPCI ने चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाला। जानें 0.4% चार्ज, छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर इसका असर।;

Update: 2026-10-13 10:30 GMT
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में दुकानदारों और डिजिटल भुगतान से जुड़े कारोबारियों को राहत मिली है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है। NPCI के अनुसार, UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के दौरान कारोबार पर अतिरिक्त दबाव से बचने के लिए यह निर्णय लिया। शुल्क लागू करने की नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। हालांकि, यह बदलाव सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होगा, बल्कि निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले कुछ कारोबारी लेनदेन तक सीमित रहेगा।

क्या है MDR और क्यों लिया गया फैसला?

MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले कारोबारी को भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंक या प्रोसेसर को देना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य भुगतान प्रणाली से जुड़े खर्चों की भरपाई करना है। यह न तो सरकारी टैक्स है और न ही ऐसा शुल्क जो हर UPI यूजर को देना होगा।

त्योहारी दिनों में बाजारों में खरीदारी और डिजिटल लेनदेन बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में शुल्क लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ाकर कारोबारियों को राहत देने का प्रयास किया गया है। नई तारीख आने तक मौजूदा नियमों के अनुसार पात्र लेनदेन जारी रहेंगे।

2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा भुगतान पर 0.4% शुल्क

पहले घोषित व्यवस्था के मुताबिक, तय श्रेणियों में आने वाले 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का प्रावधान है। 75,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित बताई गई है। वहीं, 2,000 रुपये तक के पात्र भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।

ध्यान रहे कि यह नियम सभी दुकानों और सभी कारोबारी भुगतानों पर लागू नहीं होगा। शुल्क उन्हीं लेनदेन पर लिया जाएगा, जो निर्धारित श्रेणियों और शर्तों के दायरे में आते हैं।

रेलवे, बीमा और उपयोगिता सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था

रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन, बिजली-पानी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के कुछ पात्र भुगतानों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था बताई गई है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित लेनदेन पर प्रतिशत के बजाय 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का शुल्क लागू करने का प्रावधान है। इसकी वास्तविक लागू स्थिति संबंधित नियमों और अधिसूचना पर निर्भर करेगी।

छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों को क्या राहत?

मौजूदा QR कोड के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान स्वीकार करने वाले पात्र छोटे कारोबारियों को शून्य-MDR व्यवस्था के तहत राहत मिलती रहेगी, बशर्ते वे तय शर्तें पूरी करते हों।

इसी तरह, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। वित्त मंत्रालय के पहले के बयान के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होने की बात कही गई थी।

दिवाली के बाद नई तारीख का इंतजार

NPCI के फैसले के बाद चुनिंदा कारोबारी भुगतानों पर MDR लागू करने की प्रक्रिया दिवाली के बाद आगे बढ़ेगी। इसकी सटीक तारीख का इंतजार है। आम UPI यूजर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि हर डिजिटल भुगतान पर चार्ज लगने का नियम नहीं है और शुल्क केवल निर्धारित कारोबारी लेनदेन पर ही लागू होगा।

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