आगरा में रो पड़े सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल, बोले- लखनऊ जाकर इस्लाम कबूल कर लूंगा
यूपी एमएलसी चुनाव 2026 के मतदान के दौरान आगरा शिक्षक खंड से सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने गड़बड़ी और कार्यकर्ताओं को परेशान करने के आरोप लगाए। मीडिया के सामने भावुक होकर उन्होंने धर्म परिवर्तन की बात भी कही।;
मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी के लगाए आरोप
डॉ. आकाश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उनके समर्थकों को परेशान किया गया और कई मतदान केंद्रों पर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि खेरागढ़ में पीठासीन अधिकारी के खाना खाने के दौरान सभी लोगों को बाहर निकाल दिया गया। सपा प्रत्याशी ने छाता के एक बूथ पर भी कथित बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगाया।
उन्होंने अधिकारियों पर अपने कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, मतदान में गड़बड़ी और बूथ कैप्चरिंग से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इन दावों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
भावुक होकर बोले- मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों?
मीडिया से बातचीत के दौरान सपा प्रत्याशी अपनी बात रखते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, मानो वह किसी दूसरे देश से आए हों। उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस कराया जा रहा है जैसे वह पाकिस्तान से आए कोई आतंकवादी हों।
आकाश अग्रवाल ने धर्म परिवर्तन की बात कहते हुए कहा कि वह इस तरह की कथित प्रताड़ना के बीच सनातन में नहीं रहना चाहते और लखनऊ जाकर इस्लाम कबूल कर लेंगे। उनका यह बयान सामने आने के बाद चुनावी माहौल में विवाद की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, यह बयान उन्होंने भावनात्मक प्रतिक्रिया के दौरान दिया था या धर्म परिवर्तन को लेकर कोई औपचारिक कदम उठाने का इरादा रखते हैं, इस बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
हार-जीत से फर्क नहीं पड़ता: सपा प्रत्याशी
डॉ. आकाश अग्रवाल ने कहा कि उन्हें चुनाव में हार या जीत की चिंता नहीं है। उनके मुताबिक, वह आजाद भारत में रह रहे हैं और किस राजनीतिक दल से चुनाव लड़ना है, इसका फैसला करने का अधिकार उन्हें है। उन्होंने मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएं अब भी हो रही हैं।
चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल
आगरा शिक्षक खंड में सपा प्रत्याशी के आरोपों ने मतदान की निष्पक्षता और चुनावी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी भी आरोप को प्रमाणित मानने से पहले संबंधित शिकायतों की जांच और अधिकारियों की प्रतिक्रिया जरूरी है। अब देखना होगा कि चुनाव अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।