सौरव दास और आशुतोष रांका फिर हिरासत में, रोक के बावजूद जंतर-मंतर पहुंचे CJP नेता
दिल्ली पुलिस ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर से हिरासत में लिया। जानिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन प्रतिबंध और CJP के विरोध की पूरी खबर।;
जंतर-मंतर पहुंचने पर पुलिस ने लिया हिरासत में
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर पहुंचने के बाद पुलिस कार्रवाई की जद में आए। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली में प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। सीजेपी नेताओं ने जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के फैसले का विरोध किया है।
हालांकि, दोनों नेताओं को हिरासत में लेने के कारणों और पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
10 अक्टूबर को भी हिरासत में लिए गए थे सीजेपी नेता
इससे पहले 10 अक्टूबर को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली में प्रदर्शन की योजना के बीच हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। रविवार को उन्हें रिहा कर दिया गया था।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रिहाई के दौरान उनसे एक साल तक शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहने और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त रखी गई थी। अब सौरव दास और आशुतोष रांका को दोबारा हिरासत में लिए जाने से विवाद फिर गहरा गया है।
दिल्ली पुलिस ने बदले प्रदर्शन के निर्धारित स्थल
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश के तहत जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया गया है। इसके स्थान पर तीन जगहों को प्रदर्शन और धरने के लिए तय किया गया है। इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।
पुलिस के इस फैसले के पीछे गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों का हवाला दिया गया है। नए स्थलों पर प्रदर्शन के आयोजन के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया जारी किए जाने की बात भी कही गई है।
‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा’
जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। वहीं, सौरव दास ने फैसले को मनमाना बताते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार किया था।
सीजेपी का कहना है कि यह फैसला शांतिपूर्ण विरोध और एकत्र होने के अधिकार से जुड़ा सवाल खड़ा करता है। दूसरी ओर, निर्धारित स्थलों में बदलाव के बाद अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस और संगठन के बीच आगे क्या स्थिति बनती है।