आतंकवाद पर अमेरिका को जयशंकर की दो टूक, बोले- हमारी सुरक्षा चिंताओं को न समझना रिश्तों के लिए समस्या

एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों की चुनौतियों पर कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से न समझना रिश्तों को प्रभावित करता है। आतंकवाद और व्यापार पर भी बोले।;

Update: 2026-09-29 05:06 GMT

न्यूयॉर्क। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ आतंकवाद का मुद्दा भी रिश्तों में एक अहम चुनौती के रूप में सामने आया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर अमेरिका के रुख पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि कोई सहयोगी देश भारत की गंभीर सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त रूप से नहीं समझता, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ना स्वाभाविक है।

जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों में मौजूदा जटिलताओं के पीछे व्यापार के साथ आतंकवाद को भी एक प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना सीमापार आतंकवाद और राज्य प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे का उल्लेख किया।

‘सुरक्षा हमारे लिए बेहद अहम मुद्दा’

जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, यदि किसी देश के लिए कोई मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है और उसका सहयोगी उस चिंता को उसी गंभीरता से नहीं देखता, तो इससे दोनों देशों के बीच भरोसे और संबंधों पर असर पड़ सकता है।

भारत लंबे समय से पाकिस्तान से होने वाले सीमापार आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। जयशंकर ने भी अपने हालिया सार्वजनिक बयानों में आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद का लगातार इस्तेमाल करने वाला देश बताते हुए आतंकवाद को सामान्य बनाने की कोशिशों का विरोध किया।

अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर भी भारत की नजर

जयशंकर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संपर्क भी चर्चा में है। भारत की चिंता यह है कि सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर उसके सुरक्षा हितों को अमेरिकी नीति में पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।

हालांकि, यह कहना कि अमेरिका ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, व्यापक अमेरिकी नीति की पूरी तस्वीर नहीं बताता। अमेरिका और भारत के बीच आतंकवाद निरोधक सहयोग पहले से मौजूद रहा है और दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद निरोधक प्रयासों सहित कई मंचों पर सहयोग किया है।

रूस से तेल और टैरिफ का मुद्दा भी अहम

भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी तनाव का एक कारण बना हुआ है। 23 सितंबर को जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की न्यूयॉर्क में मुलाकात हुई थी, जिसमें रूस और ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों तथा ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई।

ऐसे में जयशंकर का ताजा बयान यह संकेत देता है कि भारत अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए अपनी सुरक्षा और ऊर्जा संबंधी प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट रूप से सामने रखना चाहता है।

Tags:    

Similar News