रूस में प्लेग का खौफ! लैब रिसर्चर की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में, जानें कितना खतरनाक है न्यूमोनिक प्लेग

रूस के साइबेरिया में एंटी-प्लेग रिसर्च संस्थान की 28 वर्षीय महिला कर्मचारी की मौत के बाद करीब 200 लोग मेडिकल निगरानी में हैं। जानें प्लेग के लक्षण, प्रकार और इलाज।;

Update: 2026-10-05 05:22 GMT

नई दिल्ली। रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक महिला रिसर्चर की मौत के बाद संभावित प्लेग संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। 28 वर्षीय महिला इरकुत्स्क के एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी और 2 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 200 लोगों को उसके संपर्क में आने के कारण मेडिकल निगरानी में रखा गया है। हालांकि, रूस की स्वास्थ्य एजेंसी रोस्पोट्रेब्नाडज़ोर ने अभी प्लेग को मौत का कारण नहीं बताया है और इसे ‘अज्ञात कारण का निमोनिया’ बताया है।

टूटी टेस्ट ट्यूब के बाद बिगड़ी तबीयत

रिपोर्टों के अनुसार, 25 सितंबर को प्रयोगशाला में काम करने के दौरान महिला से एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। इसमें कथित तौर पर येर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया मौजूद था। इसके कुछ दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर निमोनिया जैसे लक्षणों के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

हालांकि, इस घटनाक्रम और महिला की मौत के बीच सीधा संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। रूसी अधिकारियों ने कहा है कि क्षेत्र की महामारी संबंधी स्थिति नियंत्रण में है और अब तक निगरानी में रखे गए लोगों में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

करीब 200 लोग निगरानी में

महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों की पहचान कर उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया है। कुछ अस्पतालों में संक्रमण से बचाव के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर मास्क को लेकर भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अभी तक निगरानी में रखे गए लोगों में प्लेग के लक्षण या पॉजिटिव टेस्ट सामने नहीं आया है।

अमेरिका भी मामले पर नजर रख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन रूस से जुड़ी जानकारी जुटा रहा है और घटनाक्रम की निगरानी कर रहा है।

क्या है प्लेग और कैसे फैलता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार प्लेग Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी है। यह आमतौर पर छोटे स्तनधारी जानवरों और उनके शरीर पर मौजूद संक्रमित पिस्सुओं से जुड़ी होती है। संक्रमित पिस्सू के काटने, संक्रमित ऊतक के संपर्क और न्यूमोनिक प्लेग में सांस के जरिए निकलने वाले संक्रमित कणों से इसका संक्रमण हो सकता है।

प्लेग के प्रमुख रूपों में ब्यूबोनिक, सेप्टीसीमिक और न्यूमोनिक प्लेग शामिल हैं। ब्यूबोनिक प्लेग में लिम्फ नोड्स में दर्दनाक सूजन होती है, जबकि सेप्टीसीमिक प्लेग में बैक्टीरिया रक्त में फैल जाता है।

सबसे खतरनाक है न्यूमोनिक प्लेग

न्यूमोनिक प्लेग में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचता है। इसके लक्षण तेजी से सामने आ सकते हैं, जिनमें बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी, खांसी और सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। यह संक्रमित व्यक्ति से सांस के संक्रमित कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।

WHO के मुताबिक, इलाज न मिलने पर न्यूमोनिक और सेप्टीसीमिक प्लेग जानलेवा हो सकते हैं। लेकिन समय पर बीमारी की पहचान और उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए रूस में सामने आई इस घटना में अभी सबसे अहम बात संपर्क में आए लोगों की निगरानी और संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि से जुड़ी जांच है।

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