राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में बयां किया दर्द, बोले- ‘17 करोड़ रुपये डूब चुके, जब चाहें जहां भेज दें, मैं तैयार हूं’
राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अभिनेता ने कहा कि इस विवाद में उनके 17 करोड़ रुपये डूब चुके हैं और वह अदालत के आदेश का पालन करने को तैयार हैं।;
नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा करीब 16 साल पुराने चेक बाउंस मामले को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म अता पता लापता से जुड़े इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाल की सुनवाई में अभिनेता को भुगतान को लेकर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने साफ किया कि पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में उन्हें जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने अपने आर्थिक नुकसान और फिल्म के अटक जाने का जिक्र करते हुए अपना पक्ष रखा।
‘17 करोड़ रुपये डूब चुके हैं’
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूरे विवाद में उनके करीब 17 करोड़ रुपये डूब चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत के निर्देश का पालन करने के लिए तैयार हैं।
राजपाल यादव ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि फिल्म प्रोजेक्ट में कुल करीब 22 करोड़ रुपये लगे थे, लेकिन फिल्म सिनेमाघरों तक सही तरीके से नहीं पहुंच सकी। उन्होंने अदालत के सामने यह भी कहा कि इस फिल्म से उन्हें कोई कमाई नहीं हुई।
अभिनेता के मुताबिक, उन्होंने पिछले वर्षों में लगातार काम किया है, लेकिन इस विवाद से जुड़ा आर्थिक नुकसान अभी तक उनके लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान पर दिया सख्त निर्देश
राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले की सुनवाई कर रही पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। अदालत ने पहले अभिनेता को बकाया रकम जमा करने का अंतिम अवसर दिया था, लेकिन तय समय में भुगतान नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
5 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत ने कहा कि पिछले आदेश का पालन नहीं किया गया है और अभिनेता को जेल जाना पड़ सकता है। इसके बाद कोर्ट ने शिकायतकर्ता की रकम की वसूली का रास्ता खुला रखने के लिए एक और सीमित मौका दिया।
2010 में लिया था करीब 5 करोड़ का कर्ज
यह पूरा विवाद वर्ष 2010 से शुरू हुआ था। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद ली थी। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही।
इसके बाद रकम वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में हुए समझौते में ब्याज सहित करीब 11 करोड़ रुपये लौटाने की बात तय हुई थी। इसके बाद 2013 में राजपाल यादव की ओर से जारी किए गए सात चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए। इसी आधार पर उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए।
2018 में दोषी, 2026 में हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2018 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया था। बाद में सजा में बदलाव हुआ और जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को राहत देते हुए भुगतान की शर्त पर अंतरिम संरक्षण दिया था। बाद में कोर्ट ने उन्हें बकाया राशि के लिए अंतिम अवसर देते हुए 2 करोड़ रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की हालिया सख्ती के बाद अब इस मामले में राजपाल यादव की अगली कानूनी रणनीति और भुगतान पर सबकी नजर है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके आदेशों का पालन नहीं होने पर जेल की सजा का रास्ता खुला रहेगा।