दिल्ली की झुग्गी में पहुंचे राहुल गांधी, 727 वोटर नाम हटाने पर उठाए सवाल; SIR पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब
राहुल गांधी ने दिल्ली के बेला एस्टेट में 727 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा कर SIR पर सवाल उठाए। चुनाव आयोग की प्रक्रिया में नाम जोड़ने के लिए दावे का मौका दिया गया है।;
SDM से फोन पर बात, बोले- वोट के अधिकार का घर से संबंध नहीं
राहुल गांधी ने मौके से ही एक उपमंडल अधिकारी (SDM) से फोन पर बात की। वीडियो में वह अधिकारी से उसका नाम और पद पूछते हुए दिखाई देते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति के पास पक्का मकान है या नहीं, इसका उसके मतदान के अधिकार से सीधा संबंध नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारी से कहा कि वह इस मामले को दूसरे तरीके से देखेंगे।
राहुल गांधी के मुताबिक, बेला एस्टेट में रहने वाले लोग लंबे समय से यहां रह रहे हैं और 2024 के लोकसभा तथा 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान कर चुके हैं। उनका दावा है कि 2023 में उनके घर तोड़े गए थे, लेकिन लोग इलाके में ही रह रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ‘हाउस नंबर जीरो’ वाले प्रावधान का भी हवाला देते हुए सवाल उठाया कि फिर इतने नाम क्यों हटाए गए।
राहुल ने SIR को बताया ‘वोट चोरी’ का तरीका
राहुल गांधी ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘वोट चोरी’ का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास पहले से कम संसाधन हैं, उनसे मतदान का अधिकार छिनना गंभीर विषय है। राहुल ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त बदल सकते हैं, लेकिन जिस व्यवस्था के तहत यह प्रक्रिया हुई, उसे भी जवाब देना होगा।
चुनाव आयोग की प्रक्रिया में दावे का मौका
मतदाता सूची के मामले में दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के मुताबिक, SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई थी। जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर तक फॉर्म-6 और जरूरी घोषणा व दस्तावेजों के साथ नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं। CEO दिल्ली ने ASDD सूची भी उपलब्ध कराई है, जिसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं से जुड़ी जानकारी दी गई है।
SIR पर आयोग ने दी सफाई
चुनाव आयोग ने हाल में कहा था कि SIR से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी हुए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की कुछ चिट्ठियां प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से संबंधित थीं, न कि SIR की नीति या IT से जुड़े मतभेदों से। वहीं, मीडिया रिपोर्ट में आयोग के भीतर SIR को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। इन दावों पर राजनीतिक विवाद अभी जारी है।