एसआईआर पर एनडीए में अलग सुर, भाजपा के 3 सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
एसआईआर विवाद के बीच एनडीए के सहयोगी दल एलजेपी रामविलास, आरएलएम और टीडीपी ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की है।;
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने चुनाव आयोग से एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
तीनों सहयोगी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच किसी तरह का संदेह पैदा होता है तो उसे दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है।
चिराग पासवान बोले- आयोग को खुद रखना चाहिए अपना पक्ष
एलजेपी (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को पटना में कहा कि चुनाव आयोग को अपने बचाव के लिए किसी सरकार की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, यदि आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उसे खुद सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।
पासवान ने कहा कि विपक्ष का काम आरोप लगाना और मुद्दे का राजनीतिकरण करना हो सकता है, लेकिन आम लोगों के बीच भरोसा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों का चुनावी व्यवस्था से विश्वास कमजोर होता है तो यह लोकतंत्र के लिए उचित स्थिति नहीं होगी।
उनका कहना था कि खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सामने आकर एसआईआर और आयोग के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
उपेंद्र कुशवाहा ने भी तत्काल स्पष्टीकरण मांगा
आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है और आयोग को तत्काल स्पष्टीकरण जारी कर इसे दूर करना चाहिए।
कुशवाहा की यह मांग ऐसे समय आई है जब SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहे हैं।
टीडीपी ने पारदर्शिता पर दिया जोर
चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग करने वाले एनडीए सहयोगी दलों में शामिल है। टीडीपी संसदीय दल के नेता लावु श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया सफल रही है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर आयोग से अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
उनके मुताबिक, चुनाव आयोग लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। किसी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने पर उचित स्पष्टीकरण और पारदर्शिता से जनता का भरोसा मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में मतदाताओं को अपनी चिंताएं रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया।
रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
एसआईआर को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठाते हुए एसआईआर प्रक्रिया पर भी आपत्ति दर्ज कराई।
हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के सदस्यों के बीच अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
बिहार भाजपा ने कहा- सहयोगियों को अपनी बात रखने का अधिकार
एनडीए सहयोगियों के बयानों पर बिहार भाजपा प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख हैं और उन्हें अपने विचार रखने का अधिकार है। भाजपा के एक अन्य पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि एलजेपी (रामविलास) और आरएलएम के साथ पार्टी का गठबंधन बिहार तक सीमित है।