नाबालिग निकली महाकुंभ की 'वायरल गर्ल' मोनालिसा, 16 साल असली उम्र, फरमान पर FIR दर्ज
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में पता चला है कि मोनालिसा विवाह के समय नाबालिग थी। इसके बाद मोनालिसा के पति फरमान पर पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज कर लिया गया है।
नई दिल्ली। महाकुंभ से सुर्खियों में आई मध्य प्रदेश की तथाकथित ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा अब गंभीर कानूनी विवादों में घिर गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले में को नया मोड़ दे दिया है। जांच में पता चला है कि मोनालिसा विवाह के समय नाबालिग थी। इसके बाद मोनालिसा के पति फरमान पर पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज कर लिया गया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद फरमान पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। आयोग की जांच के मुताबिक, पारधी जनजाति से जुड़ी मोनालिसा की उम्र शादी के वक्त 18 वर्ष से कम थी। यह विवाह 11 मार्च 2026 को केरल में संपन्न हुआ था। शिकायतकर्ता अधिवक्ता प्रथम दुबे की ओर से 17 मार्च 2026 को आयोग में याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद गठित जांच दल ने केरल से लेकर महेश्वर तक दस्तावेजों की गहन पड़ताल की।
दस्तावेजों ने खोली पोल, उम्र निकली महज 16 साल
जांच में सबसे बड़ा खुलासा महेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड से हुआ, जहां मोनालिसा की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज पाई गई। इस आधार पर शादी के समय उसकी उम्र करीब 16 वर्ष बैठती है। इतना ही नहीं, केरल में विवाह पंजीयन के दौरान प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र में अलग जन्मतिथि दर्ज होने का मामला भी सामने आया है। जांच टीम ने इसे गंभीर गड़बड़ी मानते हुए संबंधित दस्तावेजों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की है।
FIR दर्ज, पति फरमान खान पर कसा शिकंजा
आयोग की सख्त अनुशंसा के बाद महेश्वर थाने में अपहरण समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में पति फरमान खान पर कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की परतें खंगालने में जुटी है। इंदौर रेंज के आईजी अनुराग ने पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
राजनीतिक साया और संगठनों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। शादी के आयोजन और संरक्षण को लेकर कुछ संगठनों और नेताओं की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल, आयोग और पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि ‘वायरल’ चमक के पीछे एक बड़ा कानूनी और सामाजिक सवाल छिपा हुआ था, जो अब पूरे सिस्टम के सामने खड़ा है।