इजरायली हमले के खतरे के बीच पिता अली खामेनेई के जनाजे से दूर रहेंगे मोजतबा, सुरक्षा कारणों से लिया बड़ा फैसला

इजरायली हमले के खतरे के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। जानिए अंतिम संस्कार का कार्यक्रम, सुरक्षा कारण और भारत के प्रतिनिधिमंडल की पूरी जानकारी।;

Update: 2026-07-03 04:49 GMT
नई दिल्ली। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों के दौरान 28 फरवरी को उनके निधन के बाद अब युद्धविराम की स्थिति बनने पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस समारोह में भारत समेत कई देशों के राजनीतिक और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। हालांकि सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि वर्तमान ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं होंगे।

सुरक्षा एजेंसियों ने जताया खतरा, सार्वजनिक कार्यक्रम से दूरी बनाएंगे मोजतबा

भारत में मोजतबा खामेनेई के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि सुरक्षा कारणों से मोजतबा अंतिम संस्कार समारोह में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है कि इजरायल की ओर से संभावित हमले और लगातार निगरानी की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। प्रतिनिधि के मुताबिक, मौजूदा हालात में सार्वजनिक उपस्थिति सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरी हो सकती है।

4 जुलाई से शुरू होंगी अंतिम संस्कार की रस्में, 9 जुलाई को मशहद में होगा दफन

जानकारी के अनुसार, अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होंगी। इसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंतिम चरण में 9 जुलाई को उन्हें उनके पैतृक और पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इन छह दिनों के दौरान लाखों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच सकते हैं।

ईरान सरकार को उम्मीद है कि देशभर से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए आएंगे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

पूरे ईरान में शोक का माहौल, जगह-जगह लगाए गए पोस्टर

अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे ईरान में शोक का माहौल है। राजधानी तेहरान से लेकर मशहद और अन्य प्रमुख शहरों तक उनकी तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं। युद्ध के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई, जबकि सामान्य इस्लामी परंपरा के अनुसार किसी भी मृतक को 24 घंटे के भीतर दफनाने की परंपरा होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के चलते अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है।

भारत से भी पहुंचेगा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल

ईरान में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में भारत का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भी हिस्सा लेगा। जानकारी के मुताबिक, बिहार के राज्यपाल सैयद हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरिटा भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वहीं, कांग्रेस की ओर से पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के भी समारोह में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

मध्य-पूर्व में हालिया तनाव के बीच यह अंतिम संस्कार वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। कई देशों की नजर इस आयोजन और उससे जुड़े सुरक्षा इंतजामों पर बनी हुई है।

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