UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता को यूरोप का समर्थन, V4 देशों ने बढ़ाया दबाव
UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक का समर्थन मिला है। जानें भारत की दावेदारी और सुरक्षा परिषद में सुधार की पूरी कहानी।;
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की कोशिश को यूरोप के चार देशों का समर्थन मिला है। स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक यानी विसेग्राड समूह (V4) के देशों ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है। यह समर्थन ऐसे समय में सामने आया है जब भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे में सुधार और इसके विस्तार की मांग करता रहा है।
V4 देशों ने भारत को बताया अहम साझेदार
स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानर ने कहा कि विसेग्राड समूह के सदस्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं और भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इन देशों के समर्थन का स्वागत किया है।
जयशंकर ने कहा कि V4 देश लंबे समय से भारत के रक्षा सहयोगी रहे हैं और दोनों पक्ष अब इस सहयोग को नए क्षेत्रों तक ले जाने पर विचार कर रहे हैं। भारत और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग UNSC सुधार के मुद्दे पर भी अहम माना जा रहा है।
UNSC में भारत की स्थिति क्या है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—शामिल हैं। इन पांच देशों के पास वीटो पावर भी है। बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं, जिनका चुनाव निश्चित अवधि के लिए किया जाता है।
भारत अब तक आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। भारत का तर्क है कि दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक परिस्थितियां 1945 की तुलना में काफी बदल चुकी हैं। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं में वर्तमान वास्तविकताओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
1994 से स्थायी सीट की मांग कर रहा भारत
भारत की ओर से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग कई दशकों पुरानी है। भारत ने 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद 2000 में संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी रखी थी।
1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद सुरक्षा परिषद का केवल एक बार विस्तार हुआ। 1965 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन के बाद सदस्यों की संख्या 11 से बढ़ाकर 15 की गई थी। हालांकि, स्थायी सदस्यों की संख्या पांच ही रही।
भारत क्यों चाहता है UNSC में सुधार?
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार को वैश्विक प्रतिनिधित्व से जोड़ता रहा है। उसका कहना है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत दुनिया के कई क्षेत्रों को मौजूदा स्थायी सदस्य व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अपने योगदान और ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने को भी अपनी दावेदारी के प्रमुख आधारों में रखता है। हालांकि, स्थायी सदस्यता और वीटो पावर के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बदलाव तथा मौजूदा सदस्य देशों की सहमति जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में V4 देशों का समर्थन भारत की कूटनीतिक कोशिशों में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।