फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक, आगजनी और लूटपाट से मचा हड़कंप; तख्तियों पर लिखा- ‘क्रांति या मौत’
फ्रांस में बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़पें हुईं। कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।;
नई दिल्ली। फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कई शहरों में हिंसक हो गया। शनिवार को पेरिस समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। कई जगह आगजनी, दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों की कुछ तख्तियों पर ‘क्रांति या मौत’ जैसे नारे लिखे थे। हिंसा के कारण देश में राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता बढ़ गई है।
1,200 से अधिक गिरफ्तार, 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के मुताबिक, हिंसा के सिलसिले में 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, घटनाओं में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। गृह मंत्रालय का दावा था कि प्रदर्शन में करीब 5.50 लाख लोग शामिल हुए, जबकि श्रमिक संगठन CGT ने प्रतिभागियों की संख्या आठ लाख से अधिक बताई।
प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। जवाब में कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं और आतिशबाजी की। सेंट-एटिएन में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए गए एक ग्रेनेड की चपेट में आने से 17 वर्षीय लड़के का दाहिना हाथ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई।
पेरिस से मार्सिले तक दुकानों में लूटपाट
हिंसा के दौरान कई शहरों में नकाबपोश समूहों ने दुकानों के शटर तोड़े और सामान लूट लिया। पेरिस, मार्सिले, नीस, नैनटेस, बोर्डो, लिमोज, लिले, टूलूज और स्ट्रासबर्ग में सुपरमार्केट, फार्मेसी, कपड़ों की दुकानों, इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर और लग्जरी बुटीक को निशाना बनाया गया।
AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस में कुछ प्रदर्शनकारी मास्क और दस्ताने पहनकर दुकानों में घुस रहे थे। रिपोर्ट में सुरक्षा कैमरों को बंद करने के बाद खिड़कियां तोड़कर अंदर प्रवेश करने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया।
लिमोज में करीब 140 साल पुरानी एक इमारत में आग लगाए जाने से उसे भारी नुकसान पहुंचा। बोर्डो में पुलिस परिसर में तोड़फोड़ हुई, जबकि ल्योन में एक पर्यटन कार्यालय को आग के हवाले किए जाने की खबर सामने आई। कई स्थानों पर सरकारी इमारतों और टाउन हॉल को भी निशाना बनाया गया।
मैक्रों की चेतावनी, दोषियों पर होगी कार्रवाई
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि तोड़फोड़, लूटपाट और सरकारी कार्यालयों या कारोबारों पर हमले करने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें सजा दी जाएगी।
वहीं, राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहे विपक्षी नेताओं ने हिंसा को राजनीतिक मुद्दा बनाया। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने दंगों की निंदा करते हुए वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों की पार्टी पर हिंसा को जायज ठहराने का आरोप लगाया। मेलेंशों ने प्रदर्शनकारियों से लूटपाट से दूर रहने की अपील की और कहा कि ऐसी गतिविधियां आंदोलन के तरीकों के खिलाफ हैं।
क्यों सड़कों पर उतरे लोग, क्या फिर होगी क्रांति?
प्रदर्शन का प्रमुख कारण जीवन-यापन की बढ़ती लागत है। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई के साथ राजनीतिक नेतृत्व, आर्थिक असमानता और अमीरों की बढ़ती संपत्ति पर भी नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने ‘मैक्रों इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाए।
इस आंदोलन की तुलना आठ साल पहले हुए ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से भी की जा रही है, जो ईंधन कर में प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ शुरू हुआ था। इस बार कुछ प्रदर्शनकारियों ने 1789 की फ्रांसीसी क्रांति का हवाला देते हुए बदलाव की मांग की।
पश्चिमी शहर ला रोशेल में ‘क्रांति या मौत’ लिखी तख्ती दिखाई दी, जबकि मोंटपेलियर में ‘जनता की जीत होगी’ का संदेश वाला बैनर लगाया गया। हालांकि, महंगाई के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन का आगे क्या स्वरूप होगा, यह आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनकारियों की रणनीति पर निर्भर करेगा।