गाजियाबाद में लिवर की नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, Liv-52 की 50 हजार टैबलेट जब्त
गाजियाबाद पुलिस ने एक नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर लिवर की नकली दवा Liv-52 बनवाकर बेचने वाले गैंग के सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे लिव-52 की करीब 50 हजार टैबलेट बरामद किए गए हैं।
गाजियाबाद। गाजियाबाद की मुरादनगर पुलिस ने एक नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर लिवर की नकली दवा Liv-52 बनवाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे लिव-52 की करीब 50 हजार टैबलेट, डेढ़ हजार खाली सफेद रंग की डिब्बी और रैपर आदि बरामद किए गए हैं।
मयंक अग्रवाल है गिरोह का सरगना
डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोदीनगर के तिबड़ा रोड निवासी गिरोह के सरगना मयंक अग्रवाल, दिल्ली के उत्तम नगर निवासी अनूप गर्ग, नंदग्राम के सुभाषनगर निवासी तुषार ठाकुर, नंदग्राम के हिंडन विहार निवासी आकाश ठाकुर और निवाड़ी निवासी नितिन त्यागी के रूप में हुई।
पुलिस 6 और लोगों की तलाश में जुटी
डीसीपी ने बताया कि नामी कंपनी के प्रतिनिधियों को अलीगढ़ से नकली टैबलेट बाजार में बेचे जाने की सूचना मिली थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने पता किया तो जानकारी मिली कि यह मुरादनगर से कुरियर द्वारा भेजी गई थी। कुरियर वाले से पूछताछ के आधार पर पता चला कि एनपी ट्रेडिंग नामक फर्म जोनी निवासी जलालाबाद मुरादनगर के नाम पर रजिस्टर्ड कराई गई थी। इस मामले में कंपनी की तरफ से 3 जनवरी 2026 को मुरादनगर थाने में तहरीर दी गई। इस प्रकरण की जांच के दौरान सामने आया कि यह गिरोह नामी कंपनी की दवाइयां बनाकर बेच रहा है। जांच में सभी के नाम प्रकाश में आने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस इनके अन्य छह साथियों की तलाश में पुलिस जुटी है। डीसीपी ने बताया गिरफ्तार करने वाली टीम को 20 हजार रुपये का इनाम भी दिया गया है।
ऐसे काम करता था गिरोह
डीसीपी ने बताया कि पूछताछ में सामने आया आरोपियों ने करीब चार माह पहले ही गिरोह बनाकर यह काम शुरू किया था। आरोपियों ने बताया सफेद डिब्बी और ढक्कन मेरठ में एकता प्लास्टिक उद्योग के मालिक कमालुद्दीन के यहां के बनवाते थे। रैपर प्रिंटिंग प्रेस खैरनगर चौपला के पास मुज्जमिल के यहां डिब्बी और ढक्कन की डाई बनाने की मशीन डाई मेकर शकील से तैयारी कराई थी। लिव-52 टैबलेट सोनीपत में सुबको लेबोरेट्रीज से बनवाते थे। सभी सामान एकत्र कर अपने साथी मुरादनगर निवासी जोनी और फरमान के साथ मिलकर पैक करते थे। फर्म में मुकेश कुमार को मालिक बनाया। फरमान जीएसटी की फर्जी बिलिंग तैयार कराता था।
जिम्मेदारी बांटी गई थी
मयंक सोनीपत की लेबोरेट्री से दवाई बनवाता था। तुषार गाजियाबाद के एक मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल (द्वितीय वर्ष) की पढ़ाई कर रहा है। उसे दवा और उससे जुड़ी जानकारी भी है। तुषार दवा की सप्लाई करने व कुरियर करने का काम करता था। पूछताछ में सामने आया कि नितिन 2023 में नगर पंचायत में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुका है।
50 हजार से अधिक गोलियां आपूर्ति कर चुके
जांच में सामने आया है कि गिरोह अब तक अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ, शामली समेत कई अन्य जिलों में इन नकली दवाइयों को सप्लाई कर चुका है। पिछले चार माह के दौरान यह गिरोह इन जिलों में 50 हजार से अधिक दवा की गोलियां सप्लाई कर चुका है। आरोपी बाजार भाव से 20 फीसदी कम में मेडिकल स्टोर संचालक को यह दवा देते थे। मेडिकल स्टोर संचालकों व जिस कंपनी में दवाएं बनवाई जा रही थीं, उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि पुलिस ने नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर लिव-52 नाम की टैबलेट बनवाकर सप्लाई करने वाले गिरोह के पांच आरोपी गिरफ्तार किए। दवाइयों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए।