SIR के बाद 12 राज्यों से हटाए गए 5.2 करोड़ नाम, यूपी में जुड़े 92 लाख नए मतदाता

निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची से करीब 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। ये कुल मतदाताओं का लगभग 10 प्रतिशत है। आयोग का कहना है कि इस कदम से आगामी चुनावों के लिए एक सटीक और पारदर्शी लिस्ट तैयार हुई है।

Update: 2026-04-12 07:06 GMT

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से करीब 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं जो कि इन राज्यों के कुल मतदाताओं का लगभग 10.2 प्रतिशत है। आयोग का कहना है कि ये अभियान वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सटीक बनाने के उद्देश्य से चलाया गया, जिसमें अनुपस्थित, ट्रांसफर, मृत, डबल पंजीकृत और अन्य अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, ताकि फर्जी मतदान की गुंजाइश खत्म हो सके।

आयोग ने बताया कि SIR का पहला चरण बिहार में शुरू किया गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तमिलनाडु जैसे 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर अभियान शुरू किया गया था। अभियान के दौरान कुल 51 करोड़ मतदाताओं की जांच की गई, जिसमें से 10.2% नाम अनुपस्थित, मृत या फर्जी पाए जाने पर हटाए गए। आयोग ने ये कदम मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के उद्देश्य से उठाया है। इस प्रक्रिया में अंदमान-निकोबार से लेकर केरल तक के चुनावी डेटा को खंगाला गया और लाखों नए नाम भी जोड़े गए।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कटे सबसे ज्याद नाम

आंकड़ों के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक 16.6% नाम हटाए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13.2% और गुजरात में 13.1% नामों की छंटनी की गई है। छत्तीसगढ़ में भी 11.3% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए। बंगाल में ये दर 10.9% रही, जहां न्यायिक प्रक्रिया के जरिए 27 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए। इन राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो या तो स्थायी रूप से ट्रांसफर हो चुके थे या उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

'6.5 करोड़ ने नहीं किया कभी मतदान'

SIR अभियान के दौरान पाया गया कि 13 करोड़ लोग अपने पंजीकृत पतों पर अनुपस्थित थे, जबकि 3.1 करोड़ लोग दूसरे राज्यों में चले गए थे। इसके अलावा मतदाता सूची ने करीब 6.5 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिन्होंने कभी मतदान ही नहीं किया। इससे फर्जी वोटिंग की आशंका बनी रहती थी। लिहाजा उन्हें हटाने से एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची तैयार हुई है। अब इन 12 प्रदेशों में शुद्धिकरण के बाद कुल 45.8 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में क्रमशः 20.9% और 10% की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पुडुचेरी में मतदाताओं की संख्या में 1% की शुद्ध गिरावट देखी गई है। मध्य प्रदेश में 5.7, राजस्थान में 5.4, केरल में 2.5 और लक्षद्वीप में 0.3% मतदाताओं की संख्या में कमी आई है।

यूपी में जोड़े गए सबसे ज्यादा नाम

आयोग ने बताया कि नाम हटाने के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने 2 करोड़ नए नाम मतदाता सूची में जोड़े भी हैं। जिसमें उत्तर प्रदेश 92.4 लाख नए मतदाताओं के साथ पहले स्थान पर है। यूपी के बाद तमिलनाडु में 35 लाख, केरल में 20.4 लाख और राजस्थान में 15.4 लाख नए नाम शामिल किए गए। मध्य प्रदेश में 12.9 लाख और गुजरात में 12 लाख से अधिक मतदाताओं ने फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के जरिए अपना पंजीकरण कराया, जिससे सूची में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है।

अब तक 60 करोड़ वोटर कवर, 39 करोड़ बाकी

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को देशभर में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए। पहले फेज में बिहार, दूसरे में 9 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे। असम में SIR के बजाय 10 फरवरी को स्पेशल रिवीजन पूरा हुआ था। इस प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में शेड्यूल में बार-बार बदलाव हुए।

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। देश के करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ शामिल किए जा चुके हैं। बाकी 39 करोड़ को तीसरे फेज में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किया जाएगा। इन 22 राज्यों-UT में प्रक्रिया इस महीने पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बाद शुरू होगी।

Tags:    

Similar News