बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ नेटवर्क पर ईडी का बड़ा एक्शन, पांच राज्यों में छापे; विदेशी फंडिंग के मिले सुराग

ईडी ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच राज्यों में 13 ठिकानों पर छापेमारी की। विदेशी फंडिंग, फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध बैंक लेन-देन की जांच तेज।;

Update: 2026-07-17 05:24 GMT

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को कथित तौर पर बसाने वाले एक संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक जांच में विदेशों से प्राप्त धनराशि के जरिए अवैध घुसपैठियों के लिए फर्जी पहचान पत्र तैयार कराने, उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में बसाने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।

पांच राज्यों में एक साथ कार्रवाई, लाखों की नकदी बरामद

ईडी की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कलिकापुर स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम से करीब 40 लाख रुपये नकद और लगभग 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए गए। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के देवबंद (सहारनपुर), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और मुर्शिदाबाद तथा महाराष्ट्र के रायगढ़ में की गई।

विदेशी फंडिंग और संदिग्ध लेन-देन की जांच

जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ ट्रस्ट, स्वयंसेवी संस्थाएं (NGOs) और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से विदेशों से प्राप्त धनराशि का उपयोग कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। ईडी अब विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया, ताकि लेन-देन पर संदेह न हो। कई तथाकथित किराये (रेंट) वाले खातों और बिचौलियों के बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।

यूपी एटीएस की एफआईआर के आधार पर दर्ज हुआ मामला

ईडी की यह जांच वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। एटीएस ने आरोप लगाया था कि एक संगठित गिरोह बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को अवैध तरीके से भारत में प्रवेश दिलाने के साथ-साथ उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य पहचान दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कराने का काम कर रहा था।

जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे लोगों को देश के अलग-अलग राज्यों में बसाने और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

छोटी-छोटी किस्तों में भेजी गई रकम

ईडी के अनुसार, संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े लोगों को 6 हजार, 8 हजार और 10 हजार रुपये जैसी छोटी-छोटी किस्तों में धनराशि भेजी जाती थी। एजेंसी का मानना है कि इस तरीके का इस्तेमाल वित्तीय निगरानी से बचने के लिए किया गया।

फिलहाल ईडी जब्त किए गए दस्तावेजों, बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क का संबंध किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय या अन्य अवैध नेटवर्क से तो नहीं है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Tags:    

Similar News