यूपी चुनाव से पहले भाजपा को झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी पार्टी; सपा में जाने पर सस्पेंस

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा को झटका लगा है। आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। सपा में जाने की अटकलें तेज हैं।;

Update: 2026-10-07 07:50 GMT
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी को रुहेलखंड क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके फैसले के बाद बरेली और आसपास के इलाकों में सियासी हलचल तेज हो गई है। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस राजनीतिक दल का रुख करेंगे। समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें जरूर तेज हैं।

धर्मेंद्र कश्यप ने कहा है कि वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद आगे का फैसला करेंगे। यानी उनके अगले राजनीतिक कदम पर अभी पूरी तरह तस्वीर साफ नहीं हुई है।

‘टाटा-बाय बाय’ पोस्ट से शुरू हुआ सियासी कयास

धर्मेंद्र कश्यप ने मंगलवार शाम अपने फेसबुक अकाउंट पर सिर्फ ‘टाटा-बाय बाय’ लिखकर एक पोस्ट की थी। इसके बाद से ही उनके भाजपा छोड़ने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। राज्यसभा के लिए भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने के ठीक बाद उनकी यह पोस्ट सामने आई थी।

इसके बाद बुधवार को धर्मेंद्र कश्यप ने मीडिया के सामने भाजपा छोड़ने की घोषणा कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्यसभा की उम्मीदवार सूची में अपना नाम नहीं होने से भी उनके नाराज होने की चर्चा थी। भाजपा ने इस बार उत्तर प्रदेश से अपने सभी मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा टिकट नहीं दिया है।

2024 में हार के बाद पार्टी से नाराजगी

धर्मेंद्र कश्यप 2014 और 2019 में आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर लगातार दो बार सांसद चुने गए थे। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के नीरज मौर्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह करीब 15,969 वोटों के अंतर से चुनाव हारे थे।

पार्टी छोड़ने के पीछे अपनी नाराजगी बताते हुए कश्यप ने आरोप लगाया कि 2024 के चुनाव में जिन लोगों ने उनके खिलाफ काम किया और कथित तौर पर भितरघात किया, उन्हें बाद में संगठन में महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को तरजीह मिलने से वह आहत हैं।

धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह भितरघात करने वालों को महत्व दिया जा रहा है।

सपा में जाने की अटकलें, लेकिन फैसला बाकी

धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़ने के बाद उनके समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनके सपा नेताओं के संपर्क में होने की बातें भी सामने आई हैं, हालांकि दोनों पक्षों की ओर से इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय होने की चर्चा है। रिपोर्टों में यह संभावना जताई जा रही है कि अगर धर्मेंद्र कश्यप सपा में जाते हैं तो परिवार की राजनीतिक भूमिका भी बदली हुई नजर आ सकती है। हालांकि, उनकी बेटी की उम्मीदवारी को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

रुहेलखंड की राजनीति पर क्या होगा असर?

धर्मेंद्र कश्यप की राजनीति का आधार मुख्य रूप से बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र रहा है। उन्होंने 2014 और 2019 में आंवला से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 2024 में हार के बावजूद क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता बनी रही।

ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले उनका भाजपा छोड़ना स्थानीय सियासत में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि धर्मेंद्र कश्यप किस दल का रुख करते हैं और उनके अगले कदम का रुहेलखंड की चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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