दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद करने के फैसले पर सीजेआई सूर्यकांत ने जताई चिंता, कपिल सिब्बल बोले- 'मेरे देश में क्या हो रहा है'

दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बीच 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। CJI सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल से यात्रियों और छात्रों की परेशानी रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने को कहा।;

Update: 2026-10-09 10:13 GMT

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों और मेट्रो सेवाओं के निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को पूरी तरह बंद किए जाने के फैसले पर गहरी चिंता जताई। पीठ ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों, यात्रियों और छात्रों की दैनिक आवाजाही को इस तरह प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

'आप सब कुछ रोक नहीं सकते': सीजेआई की पीठ

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से बातचीत करते हुए कहा, "हम मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन बंद होने से बेहद परेशान हैं। हमारी प्राथमिक चिंता ग्रेटर नोएडा, साउथ दिल्ली और दूर-दराज के इलाकों से रोजी-रोटी कमाने आने वाले हजारों आम यात्रियों और छात्रों को लेकर है। आप सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सब कुछ पूरी तरह बंद नहीं कर सकते।"

कोर्ट ने सुझाव दिया कि मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह सील करने के बजाय मेट्रो की फ्रीक्वेंसी कम करने जैसे रेगुलेटरी कदम उठाए जा सकते हैं। CJI ने वकीलों के स्टाफ और क्लर्कों का उदाहरण देते हुए कहा कि आम नागरिकों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन को तुरंत ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।

कपिल सिब्बल ने उठाए सुरक्षा पाबंदियों पर सवाल

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगने वाली याचिका का जिक्र करते हुए कोर्ट में कहा कि दिल्ली में कई ट्रेनें रद्द की जा रही हैं और मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर मेरे देश में क्या हो रहा है? पूरी दिल्ली को इस तरह बंद कैसे किया जा सकता है?" सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए शीर्ष अदालत ही अंतिम प्राधिकार है।

प्रशासन का तर्क: शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ को अवगत कराया कि सुरक्षा के नाम पर 221 सीएपीएफ (CAPF) कंपनियां तैनात की गई हैं, 10 डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं और होटलों को नई बुकिंग न लेने के निर्देश दिए गए हैं।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पाबंदियों का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी अप्रिय या गैरकानूनी गतिविधि को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने का सुझाव देते हुए कहा कि वह हाई कोर्ट को आज ही इस मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश देंगे।

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