राकेश टिकैत से मिले सीजेपी नेता, साझा आंदोलन की अटकलें तेज; किसानों-छात्रों की संयुक्त रणनीति पर मंथन

CJP नेताओं ने किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात कर भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। किसानों और छात्रों के संभावित संयुक्त आंदोलन, राजस्थान महापंचायत और सरकार से समझौते को लागू करने की मांग पर बढ़ी हलचल।;

Update: 2026-07-29 07:32 GMT

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद सक्रिय हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब अपने जनसंपर्क अभियान को व्यापक बनाने में जुटी दिखाई दे रही है। इसी क्रम में CJP के नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की। इस बैठक के बाद किसानों और छात्रों के संभावित संयुक्त आंदोलन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभिन्न जन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाई जा सकती है।

किसानों और युवाओं को एक मंच पर लाने की चर्चा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत मौजूद रहे। बैठक के दौरान भविष्य के आंदोलनों, किसानों और छात्रों से जुड़े मुद्दों तथा व्यापक जनसमर्थन तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ।

बताया जा रहा है कि CJP का उद्देश्य छात्रों, युवाओं और किसानों को एक साझा मंच पर लाकर विभिन्न जनहित के मुद्दों पर आवाज बुलंद करना है। आशुतोष रांका ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि किसान, छात्र और युवा मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखेंगे।

राजस्थान में महापंचायत की तैयारी

इस बीच भारतीय किसान यूनियन टिकैत (अराजनीतिक) ने राजस्थान के अलवर जिले के सरिस्का क्षेत्र और आसपास के 186 गांवों की भागीदारी के साथ 30 जुलाई को एक बड़ी महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि इस महापंचायत में किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

राजस्थान में प्रस्तावित यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब विभिन्न किसान संगठन केंद्र सरकार की नीतियों और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सामने रख रहे हैं।

पहले भी बनी थी आंदोलन की रणनीति

इससे पहले प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों ने दिल्ली की ओर कूच करने की तैयारी की थी। हालांकि, हरियाणा पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद किसान संगठनों ने आगे की रणनीति पर विचार करने की बात कही थी। किसान नेताओं का दावा था कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में किसान आंदोलन में शामिल होने वाले थे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बदले आंदोलन के संकेत

नीट पेपर लीक विवाद के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपने अगले चरण की रणनीति के संकेत दिए थे। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उस समय कहा था कि यह केवल शुरुआत है और आगे की दिशा पर संगठन जल्द फैसला करेगा। हालांकि, अब तक किसी नए आंदोलन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सरकार से समझौते को लागू करने की मांग

CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने हाल ही में केंद्र सरकार पर 25 जुलाई को हुई वार्ता के दौरान दिए गए आश्वासनों को लागू नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेनी चाहिए, भविष्य में नई एफआईआर दर्ज न करने का लिखित आश्वासन देना चाहिए और वार्ता में हुए समझौते का सम्मान करना चाहिए।

रांका ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तय वादों को लागू नहीं किया, तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। फिलहाल किसानों और छात्रों के संभावित साझा अभियान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं, जबकि दोनों पक्षों की ओर से औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

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