CJP Protest: पुलिस ने झोंकी पूरी ताकत, फिर भी दिल्ली में प्रदर्शन; कहां से आए हजारों लोग?

CJP Protest के बीच दिल्ली में 40 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, मेट्रो और इंटरनेट पर पाबंदियां तथा रात में हिरासत की कार्रवाई हुई। पुणे से दिल्ली आ रहे छात्रों को इटारसी में भी रोका गया।;

Update: 2026-10-10 10:42 GMT

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। जंतर-मंतर और आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां और मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का निलंबन जैसे कदम उठाए गए। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के 40 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की खबरों के बावजूद राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारी जुटने की कोशिश करते रहे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी सख्ती के बावजूद लोग दिल्ली में कैसे पहुंचे।

दिल्ली में 40 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में 40 हजार से अधिक पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान तैनात किए गए। इनमें दिल्ली पुलिस के 15 हजार से अधिक कर्मी और करीब 26 हजार केंद्रीय बलों के जवान शामिल बताए गए।

नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटा गया और प्रदर्शनकारियों की संभावित आवाजाही रोकने के लिए 37 स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तरों की सुरक्षा लगाई गई। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को प्रतिबंधों की जानकारी भी दी।

मेट्रो, इंटरनेट और ट्रैफिक पर भी असर

प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद करने की योजना बनाई गई थी। बाद में संशोधित व्यवस्था के तहत 45 स्टेशनों पर पाबंदियां लागू किए जाने की जानकारी सामने आई। जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक निलंबित की गईं।

इसके अलावा मध्य दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन और जांच की व्यवस्था की गई। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली कुछ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को भी निर्धारित समयावधि में रद्द किया गया। इन कदमों से यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई।

पुणे से आए छात्र, इटारसी में रोके गए

प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दूसरे राज्यों से लोगों के आने की कोशिशों के भी मामले सामने आए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे से दिल्ली जा रहे छात्र और युवा कार्यकर्ताओं को मध्य प्रदेश के इटारसी में ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट में कम से कम 14 छात्रों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। ये छात्र विभिन्न छात्र और युवा संगठनों से जुड़े बताए गए।

इससे पहले भी मध्य प्रदेश के भोपाल, इटारसी और ग्वालियर में दिल्ली जा रहे प्रदर्शनकारियों को रोके जाने की खबरें आई थीं। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए कार्रवाई की गई।

रात में ही एक हजार लोगों को हिरासत में लेने की खबर

प्रदर्शन से पहले शुक्रवार रात दिल्ली में कम से कम एक हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें करीब 250 लोग दक्षिण-पूर्वी दिल्ली, खासकर शाहीन बाग इलाके से थे। शाहदरा और पूर्वी दिल्ली से भी 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई।

पुलिस की कार्रवाई केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रही। होटलों, गेस्ट हाउस, हॉस्टलों और पीजी में ठहरे लोगों की भी जांच की गई, ताकि संभावित भीड़ जुटने की जानकारी मिल सके।

प्रदर्शनकारी क्यों जुट रहे हैं?

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी और उसके समर्थकों का आरोप है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शन रोकने के इंतजाम किए।

10 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों से स्पष्ट है कि पुलिस ने दिल्ली के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने की कोशिश की। इसके बावजूद विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन की कोशिशें जारी रहीं। हालांकि, राजधानी में नजर आ रहे सभी लोगों की संख्या और उनके अलग-अलग राज्यों से आने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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