CJP प्रदर्शन की हिंसा पर क्राइम ब्रांच की जांच, पुलिसकर्मियों पर हमले और तोड़फोड़ के आरोपों की होगी पड़ताल

20 जुलाई के CJP संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शुरू कर दी है। पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान के आरोपों की जांच होगी।;

Update: 2026-10-08 08:31 GMT

नई दिल्ली। 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच का फोकस हिंसा के दौरान हुई घटनाओं, पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, सरकारी वाहनों और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा प्रदर्शन के दौरान आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों की भूमिका पर है।

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। प्रदर्शन NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए आयोजित किया गया था।

हिंसा पहले से तय थी या मौके पर बिगड़ा माहौल?

क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि 20 जुलाई की हिंसा किसी पूर्व योजना का हिस्सा थी या फिर प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के शामिल होने से स्थिति अचानक बिगड़ी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बैरिकेड तोड़ने, पथराव और कथित तोड़फोड़ में कौन लोग शामिल थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने के बाद संसद मार्ग के आसपास स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और बल प्रयोग के जरिए भीड़ को पीछे हटाने की कोशिश की। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग

पुलिस का आरोप रहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। वहीं, प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग पर सवाल उठाए हैं। Amnesty International ने भी बाद में 20 जुलाई की घटनाओं को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों के आधार पर जांच प्रकाशित की थी।

ऐसे में क्राइम ब्रांच की जांच का एक अहम हिस्सा उपलब्ध वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और दर्ज मामलों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करना होगा।

FIR और मामलों को लेकर भी जांच जारी

20 जुलाई की घटनाओं के बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई थीं। बाद में कुछ मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया भी सामने आई। हालांकि, हिंसा, तोड़फोड़ या आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े आरोपों वाले मामलों को लेकर अलग स्थिति बताई गई थी।

वहीं, प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट के इस्तेमाल को लेकर भी अलग से FIR दर्ज हुई थी। इस मामले में एक प्रदर्शनकारी की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने अगस्त में केस दर्ज किया था।

अब क्राइम ब्रांच की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई की हिंसा में वास्तव में किन लोगों की भूमिका थी और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए अलग-अलग आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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