सीजेपी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा, दोपहर 2 बजे करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस
CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की अदालत ने 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा किया। तीनों नेता दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।;
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
अदालत ने तीनों नेताओं की रिहाई के साथ शर्त रखी है कि वे अगले एक साल तक शांति भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे और अच्छा व्यवहार बनाए रखेंगे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रत्येक नेता के लिए 50 हजार रुपये का बांड भरा गया है।
CJP की लीगल अफेयर्स प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए रिहाई की जानकारी साझा की। तीनों नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान से उतरते ही हिरासत में लिया गया था। वे जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने आए थे।
सीजेपी ने सोशल मीडिया पर जताई खुशी
तीनों नेताओं की रिहाई के बाद CJP ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि आखिरकार दिल्ली पुलिस को अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करना पड़ा। पार्टी ने अपने संदेश में कहा, “कॉकरोच कभी मरते नहीं हैं।”
अब सभी की निगाहें दोपहर 2 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हैं। इसमें नेताओं की हिरासत, अदालत की शर्तों और आंदोलन की आगे की रणनीति पर पार्टी का रुख सामने आ सकता है।
दिल्ली में अब भी सुरक्षा सख्त
CJP नेताओं की रिहाई के बावजूद राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल और अशोक रोड समेत कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। सुप्रीम कोर्ट के आसपास भी पुलिस बल तैनात किया गया है और भीड़ जुटने पर निगरानी रखी जा रही है।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का हवाला दिया।
पुलिस के नाम पर वायरल वीडियो पर भी सवाल
इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो दोबारा प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने प्रदर्शन के समर्थन में नौकरी से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली पुलिस ने जुलाई 2026 में इस दावे को भ्रामक बताया था। पुलिस के अनुसार, उसके रिकॉर्ड में वीडियो में बताए गए विवरण से मेल खाने वाला कोई सब-इंस्पेक्टर नहीं मिला।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करें। गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।