जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति, सीजेपी नेता सौरव दास बोले- ‘पुलिस कौन होती है?’

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। सौरव दास ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन की सूचना देने की बात कही।;

Update: 2026-10-07 08:31 GMT

नई दिल्ली। 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने बुधवार को संसद मार्ग थाने पहुंचकर दिल्ली पुलिस को प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दी। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जाएगा। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

दास ने कहा कि पुलिस को प्रदर्शन की जानकारी इसलिए दी गई है, ताकि बाद में यह सवाल न उठे कि आयोजकों ने प्रशासन को सूचना नहीं दी थी। उन्होंने दावा किया कि सीजेपी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करेगी।

‘प्रदर्शन की अनुमति देने वाली पुलिस कौन होती है?’

प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद सौरव दास ने जंतर-मंतर जैसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की अनुमति की जरूरत पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि पुलिस की जिम्मेदारी प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था संभालना होना चाहिए।

दास ने कहा कि जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल रहा है। ऐसे में उनका तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आयोजकों को केवल प्रशासन को सूचना देने और निर्धारित नियमों का पालन करने की आवश्यकता होनी चाहिए।

हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अब 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को लेकर आयोजकों और प्रशासन के बीच आगे क्या स्थिति बनती है, इस पर नजर है।

मुंबई प्रदर्शन के बाद हुआ था 10 अक्टूबर का ऐलान

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि यदि सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देश के अलग-अलग हिस्सों से सीजेपी समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे।

सीजेपी का मुख्य मुद्दा एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल है। पार्टी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।

महाराष्ट्र में कार्यकर्ताओं को नोटिस का भी आरोप

10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र पुलिस पर सीजेपी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि चंद्रपुर क्षेत्र में कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस नोटिस दिए गए और उनसे दिल्ली जाने के खर्च तथा यात्रा से संबंधित सवाल पूछे गए। साथ ही, प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की सलाह दिए जाने का भी आरोप लगाया गया।

हालांकि, चंद्रपुर पुलिस अधीक्षक के मुताबिक ऐसे नोटिस किसी भी प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले की जाने वाली नियमित और निवारक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यानी इस मामले में सीजेपी के आरोप और पुलिस का पक्ष अलग-अलग हैं।

एसआईआर पर चुनाव आयोग और विपक्ष आमने-सामने

सीजेपी के प्रदर्शन के बीच SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच भी राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दल चुनाव आयोग से एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर जवाब मांग रहे हैं, जबकि आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसलों में तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज किया है।

अब सीजेपी के 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन पर सबकी नजर है। अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आयोजकों ने प्रदर्शन की सूचना पुलिस को दे दी है। ऐसे में आगे प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत से कार्यक्रम का स्वरूप और स्थान तय होने की संभावना है।

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