एक पैर से कूदकर स्कूल जाती थी 7 साल की रागिनी, खबर मिलते ही घर पहुंचे डीएम; ट्राईसाइकिल और इलाज का किया इंतजाम

उत्तर प्रदेश के बलिया की 7 वर्षीय दिव्यांग छात्रा रागिनी एक पैर से कूदकर स्कूल जाती थी। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने घर पहुंचकर ट्राईसाइकिल और इलाज की व्यवस्था कराई।;

Update: 2026-09-03 05:32 GMT
बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में सात साल की एक बच्ची की कहानी ने संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश की है। मनियर ब्लॉक की दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव की रहने वाली कक्षा एक की छात्रा रागिनी एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद रोज स्कूल जाती थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार उसके लिए बेहतर इलाज और आवागमन का साधन उपलब्ध नहीं करा सका। ऐसे में वह एक पैर पर कूदते हुए करीब 400 मीटर दूर प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा पहुंचती थी।

रागिनी के संघर्ष का वीडियो और उसकी परेशानी प्रशासन तक पहुंची तो जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह अधिकारियों की टीम के साथ उसके घर पहुंचे। उन्होंने बच्ची और उसके परिवार से बातचीत कर उसकी स्थिति की जानकारी ली।

जिलाधिकारी ने घर पहुंचकर जाना रागिनी का हाल

जिलाधिकारी ने रागिनी से उसकी पढ़ाई, स्कूल आने-जाने और रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उसकी मां बबीता देवी और दादा से भी बातचीत की। प्रशासन की ओर से बच्ची को स्कूली किताबें और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई, ताकि उसकी शिक्षा प्रभावित न हो।

रागिनी के लिए आवागमन की समस्या को देखते हुए मौके पर ही दो ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। इसके अलावा उसके पैर की चिकित्सकीय जांच और उचित इलाज कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए।

टूटी सड़क देखकर डीएम ने दिए मरम्मत के निर्देश

रागिनी के घर तक पहुंचने के दौरान जिलाधिकारी ने गांव की जर्जर सड़क की स्थिति भी देखी। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को सड़क की मरम्मत कराने के निर्देश दिए। इससे केवल रागिनी ही नहीं, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी आने-जाने में राहत मिलने की उम्मीद है।

परिवार को घर में शौचालय निर्माण के लिए पहले से स्वीकृत राशि जल्द उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया गया।

गांव में लगेगा दिव्यांग सहायता कैंप

जिलाधिकारी ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को पूरे गांव में विशेष कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। कैंप के जरिए पात्र दिव्यांगजनों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक और आवश्यक भौतिक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

छह महीने की उम्र में हुआ था हादसा

जानकारी के मुताबिक, रागिनी जब महज छह महीने की थी, तब एक सड़क दुर्घटना में उसके पैर को गंभीर नुकसान पहुंचा था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका समुचित इलाज नहीं हो सका। इसके बावजूद बच्ची ने पढ़ाई नहीं छोड़ी।

रानीपुर से स्कूल की दूरी करीब 400 मीटर है, जिसे रागिनी अब तक एक पैर पर कूदते हुए तय करती थी। उसकी पढ़ने की इच्छा और हौसले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल मदद का हाथ बढ़ाया।

इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभय कुमार राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह और जिला पंचायत राज अधिकारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की इस पहल से रागिनी के परिवार में खुशी है और उसकी पढ़ाई को अब बेहतर सहारा मिलने की उम्मीद है।

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