असम सरकार का सख्त संदेश: बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मियों की जाएगी नौकरी

असम सरकार ने बहुविवाह के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए ऐसे सरकारी कर्मचारियों की नौकरी समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार पर विशेष जोर दिया गया।;

Update: 2026-07-11 07:03 GMT
गुवाहाटी। असम सरकार ने सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बहुविवाह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के वित्त मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए घोषणा की कि बहुविवाह में लिप्त पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित नियमों के अनुसार ऐसे कर्मचारियों की सेवा समाप्त की जा सकेगी और उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।

सामाजिक सुधार को बढ़ावा देने की पहल

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल प्रशासनिक अनुशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, लैंगिक समानता और जिम्मेदार नागरिकता को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए असम सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1964 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए लोगों को भी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से बाहर रखने की योजना बनाई गई है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी सरकार की इस नीति का समर्थन करते हुए कहा कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कठोर कदम उठाना समय की मांग है। उन्होंने दोहराया कि बहुविवाह को हतोत्साहित करने के लिए कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सख्ती बरती जाएगी।

पहले ही बन चुका है कानून

गौरतलब है कि राज्य विधानसभा पिछले वर्ष असम बहुविवाह निषेध अधिनियम पारित कर चुकी है। इस कानून के तहत पहली शादी समाप्त किए बिना दूसरी शादी करने पर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अब प्रस्तावित सेवा नियम संशोधन से सरकारी कर्मचारियों पर इसकी जवाबदेही और बढ़ जाएगी।

रोजगार और कल्याण योजनाओं पर भी फोकस

बजट में राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में दो लाख युवाओं को सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी घोषित किया है। इसके लिए रिक्त पदों को भरने के साथ नए पदों के सृजन की भी योजना है। सरकार के अनुसार, बीते पांच वर्षों में 1.64 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बहुविवाह के खिलाफ यह सख्त रुख सामाजिक बदलाव की दिशा में अहम साबित हो सकता है। हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन और निष्पक्ष जांच व्यवस्था पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।

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