ओवैसी ने सपा को दिया गठबंधन का ऑफर, बोले- भाजपा को रोकने के लिए साथ आएं, नहीं तो अकेले लड़ेंगे चुनाव
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी ने सपा और विपक्षी दलों को गठबंधन का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने भाजपा को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने की बात कही और साथ नहीं मिलने पर AIMIM के अकेले चुनाव लड़ने का संकेत दिया।;
ओवैसी का सपा को खुला ऑफर
ओवैसी ने कहा कि AIMIM पहले भी विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की बात करती रही है। उनका कहना है कि BJP को रोकने के लिए विपक्षी दलों को एक साथ आने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सपा को संबोधित करते हुए कहा कि उनके गठबंधन प्रस्ताव को कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
AIMIM प्रमुख ने संकेत दिया कि अगर सपा साथ आती है तो मिलकर चुनाव लड़ने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन प्रस्ताव ठुकराए जाने की स्थिति में उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि 2027 में उनकी पार्टी उस गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी, जिसने 2024 लोकसभा चुनाव में BJP के खिलाफ प्रदर्शन किया था। ऐसे में फिलहाल AIMIM और सपा के बीच किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।
‘मुसलमान किसी की बपौती नहीं’
श्रावस्ती में ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दशकों से अलग-अलग राजनीतिक दलों ने मुस्लिम समुदाय के वोट का इस्तेमाल किया, लेकिन उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व के सवाल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
ओवैसी ने मदरसों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मदरसों पर कार्रवाई हुई, लेकिन सपा और अन्य कथित धर्मनिरपेक्ष दलों ने पर्याप्त हस्तक्षेप नहीं किया। ये आरोप ओवैसी के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
AIMIM बोली- सिर्फ मुस्लिम नहीं, सभी के न्याय की बात
ओवैसी ने कहा कि AIMIM की राजनीति केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है। उन्होंने दलितों और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों और न्याय की बात करते हुए सपा से अपने राजनीतिक दृष्टिकोण का अंतर बताया।
इससे पहले भी ओवैसी उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की संभावना को लेकर सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव रखते रहे हैं। सितंबर में उन्होंने समान विचार रखने वाली पार्टियों के साथ गठबंधन की बात कही थी।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी AIMIM के प्रस्ताव पर बातचीत करेगी? अखिलेश यादव की हालिया टिप्पणी मौजूदा सपा-कांग्रेस गठबंधन को जारी रखने की ओर इशारा करती है, जबकि ओवैसी लगातार विपक्षी एकता का अपना प्रस्ताव दोहरा रहे हैं।