‘पद्मावत’ के जौहर वाले बयान पर घिरीं स्वरा भास्कर, बोलीं- मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया

स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उनसे साल 2018 में फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली को लिखे गए उनके ओपन लेटर के बारे में पूछा गया था। इसी सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने ‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स को लेकर अपनी आपत्ति समझाई थी।;

Update: 2026-09-02 05:00 GMT

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने पुराने बयान को लेकर विवादों में हैं। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान ‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स और फिल्म में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर चर्चा करते हुए उनकी कही कुछ बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इसके बाद कई यूजर्स ने उन पर रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। अब स्वरा भास्कर ने सफाई देते हुए कहा है कि उनके बयान को गलत तरीके से अनुवादित और पेश किया जा रहा है।

वायरल वीडियो पर स्वरा ने दी सफाई

स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उनसे साल 2018 में फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली को लिखे गए उनके ओपन लेटर के बारे में पूछा गया था। इसी सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने ‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स को लेकर अपनी आपत्ति समझाई थी। अभिनेत्री ने कहा कि उनकी बातों को अब इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा हो। स्वरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा था।

‘मैंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा’

स्वरा के मुताबिक, सोशल मीडिया पर उनके बयान का एक हिस्सा वायरल किया गया और उसका अर्थ बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अंग्रेजी में अपनी बात रखी थी और उसे समझे बिना गलत अनुवाद के साथ प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी बयान या भाषा को समझने में परेशानी हो तो पहले उसका सही अर्थ जानने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि मनगढ़ंत तरीके से किसी बात को फैलाने से लोगों में अनावश्यक आक्रोश पैदा होता है।

क्या था स्वरा के बयान का संदर्भ?

स्वरा ने बताया कि ‘पद्मावत’ के क्लाइमैक्स को देखते समय उनके मन में एक सवाल उठा था। उन्होंने इसे एक काल्पनिक परिस्थिति के जरिए समझाया। उनका कहना था कि यदि कोई महिला यौन हिंसा का सामना करने के बाद जीवित बचती है, तो उसे इस वजह से खुद को दोषी या कमजोर महसूस नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, उनकी आपत्ति उस सोच से है जिसमें महिला की जिंदगी की तुलना उसकी तथाकथित ‘इज्जत’ या शारीरिक पवित्रता से की जाती है। स्वरा ने कहा कि किसी महिला के साथ यौन हिंसा होने के बाद उसकी जिंदगी समाप्त नहीं हो जाती और समाज को सर्वाइवर्स को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का संदेश देना चाहिए।

‘क्या महिला की जिंदगी से ज्यादा जरूरी है उसकी पवित्रता?’

अभिनेत्री ने अपने बयान के जरिए फिल्मों में महिलाओं को लेकर दिखाई जाने वाली सोच पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी कहानी या दृश्य दिखाए जाने चाहिए, जिनसे यह संदेश जाए कि महिला की शारीरिक पवित्रता उसकी जिंदगी से अधिक महत्वपूर्ण है। स्वरा ने कहा कि यौन हिंसा का सामना करने वाले लोगों को यह संदेश नहीं दिया जाना चाहिए कि उनके साथ हुई घटना के बाद उनका जीवन किसी तरह कम मूल्यवान हो गया है। उनके अनुसार, इस तरह की सोच समाज में पीड़ितों के प्रति गलत नजरिया पैदा कर सकती है।

2018 में भी ‘पद्मावत’ पर जताई थी आपत्ति

स्वरा भास्कर ने 2018 में ‘पद्मावत’ की रिलीज के बाद संजय लीला भंसाली को एक खुला पत्र लिखा था। उस समय उन्होंने फिल्म के अंत में जौहर के चित्रण को लेकर अपनी असहमति जाहिर की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि महिलाओं के लिए आत्मबलिदान को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। हालिया कार्यक्रम में इसी पुराने पत्र का संदर्भ आने के बाद विवाद दोबारा सामने आया है।

रेप कल्चर का भी उठाया मुद्दा

स्वरा ने अपने स्पष्टीकरण में देश में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में फिल्मों और समाज दोनों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि महिलाओं और यौन हिंसा के सर्वाइवर्स को किस तरह का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि उनका सवाल जौहर करने वाली महिलाओं की निंदा करना नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक सोच पर सवाल उठाना है जिसमें महिला की जिंदगी से उसकी ‘इज्जत’ को ऊपर रखा जाता है। स्वरा के स्पष्टीकरण के बाद अब विवाद के बीच उनका मूल तर्क एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर समर्थन और आलोचना, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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