मुंबई/चंडीगढ़: दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म ‘सतलुज’ को रिलीज के महज दो दिन बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा लिया गया है। पहले ‘पंजाब 95’ नाम से चर्चित रही इस फिल्म को लंबे इंतजार और कई अड़चनों के बाद नए नाम के साथ स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध कराया गया था। लेकिन अचानक इसे प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के फैसले ने फिल्म इंडस्ट्री, राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में नई बहस छेड़ दी है। फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनकी न्याय की लड़ाई से प्रेरित है। ऐसे में इसके हटने को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
दिलजीत दोसांझ की प्रतिक्रिया ने बढ़ाई चर्चा
फिल्म हटाए जाने के बाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने फिल्म का एक दृश्य पोस्ट करते हुए लिखा कि वह "अंधेरे को चुनौती देते हैं"। साथ ही उन्होंने कहा कि "जो सतलुज के साथ हुआ, वही शहीद जसवंत सिंह खालड़ा के साथ भी हुआ था।" दिलजीत की इस टिप्पणी को कई लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक घटनाओं को सामने लाने के अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस बयान ने विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।
ZEE5 ने क्या कहा?
फिल्म हटाने के फैसले पर ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी किया। प्लेटफॉर्म ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अगले आदेश तक ‘सतलुज’ स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं रहेगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे फिल्म और उसकी पूरी टीम पर पूरा भरोसा है। बयान में कहा गया कि दर्शकों ने फिल्म को भरपूर प्यार दिया और उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए प्लेटफॉर्म आभारी है। साथ ही यह भी बताया गया कि फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए सभी कानूनी और आवश्यक विकल्पों पर काम किया जा रहा है। हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन परिस्थितियों या कारणों से फिल्म को अस्थायी रूप से हटाया गया है।
तीन साल के इंतजार के बाद हुई थी रिलीज
‘सतलुज’ का सफर आसान नहीं रहा। यह फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई थी और लंबे समय तक रिलीज का इंतजार करती रही। विभिन्न स्तरों पर चली प्रक्रिया के बाद आखिरकार इसे नए नाम के साथ ZEE5 पर रिलीज किया गया था। रिलीज के शुरुआती दिनों में फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। सोशल मीडिया पर इसकी कहानी, अभिनय और विषय को लेकर व्यापक चर्चा हुई। लेकिन रिलीज के दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटाने के फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।
राजनीतिक दलों की भी आई प्रतिक्रिया
फिल्म हटाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को सामने लाने वाली फिल्म को इस तरह हटाया जाना दुखद है। उन्होंने इसे केवल सेंसरशिप का मामला नहीं, बल्कि इतिहास, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामूहिक स्मृति से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है और ऐतिहासिक घटनाओं पर बनी फिल्मों को दबाने के बजाय उन पर खुली चर्चा होनी चाहिए।
वहीं कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस मुद्दे पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई फिल्म तथ्यों पर आधारित है तो उसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
उधर, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि इतिहास के कठिन अध्यायों को सामने लाना जरूरी है, लेकिन उन्हें इस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि समाज में भाईचारा और सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।
हरभजन सिंह ने फिल्म की सराहना की
पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि फिल्म ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही की लड़ाई का प्रतीक है। हरभजन ने कहा कि पुलिस और कानून व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा करना होता है। उन्होंने लिखा कि जसवंत सिंह खालरा ने कथित अवैध गुमशुदगियों और गुप्त अंतिम संस्कारों से जुड़े मुद्दों को उजागर करने का साहस दिखाया, जिसकी चर्चा इतिहास में हमेशा रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं और ऐसी कहानियां समाज को अतीत से सीख लेने का अवसर देती हैं। अपने संदेश के अंत में उन्होंने फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के प्रयासों की सराहना की।
जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर आधारित है फिल्म
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित फिल्म है। कहानी पंजाब के उस दौर को दिखाती है जब उन्होंने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मामलों को उजागर करने का प्रयास किया। फिल्म उनके संघर्ष, साहस और न्याय की तलाश को केंद्र में रखकर बनाई गई है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं। उनके अलावा अर्जुन रामपाल, कनवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम किरदार निभा रहे हैं।
चर्चाएं लगातार जारी
फिलहाल ‘सतलुज’ ZEE5 पर उपलब्ध नहीं है और दर्शक इसके दोबारा प्लेटफॉर्म पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। ZEE5 ने भरोसा दिलाया है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। दूसरी ओर, फिल्म को हटाए जाने के कारणों को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद फिल्म फिर से दर्शकों के लिए कब उपलब्ध हो पाएगी।