सैफ-अमृता की शादी में क्यों नहीं पहुंची थीं सोहा और सबा? सालों बाद बहनों ने खोला राज, बचपन की यादें भी कीं साझा

नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो डबल डेट में बातचीत के दौरान सोहा और सबा ने अपने बचपन और परिवार से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। इसी दौरान उन्होंने सैफ और अमृता सिंह की शादी का भी जिक्र किया।;

Update: 2026-08-08 10:02 GMT

मुंबई: अभिनेता सैफ अली खान की जिंदगी से जुड़े कई किस्से ऐसे हैं, जिनका जिक्र अक्सर होता रहा है, लेकिन कुछ सवालों के जवाब लंबे समय तक लोगों के सामने नहीं आए। इनमें से एक सवाल यह भी रहा कि सैफ अली खान की पहली शादी में उनकी बहनें सोहा अली खान और सबा पटौदी क्यों शामिल नहीं हुई थीं। अब दोनों बहनों ने इस राज से पर्दा उठाते हुए बताया है कि उन्हें भाई की शादी की जानकारी अचानक मिली थी और परिवार ने उन्हें इस बारे में किसी से बात करने से मना किया था।

प्रिंसिपल के ऑफिस में मिली थी शादी की खबर

नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो डबल डेट में बातचीत के दौरान सोहा और सबा ने अपने बचपन और परिवार से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। इसी दौरान उन्होंने सैफ और अमृता सिंह की शादी का भी जिक्र किया। सोहा ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, उस समय वह और सबा स्कूल में पढ़ती थीं। दोनों बहनों को स्कूल के प्रिंसिपल के ऑफिस में बुलाया गया था, जहां उनके माता-पिता का फोन आया था। परिवार की ओर से उन्हें साफ निर्देश दिया गया था कि वे इस बारे में किसी को कुछ न बताएं। सोहा के मुताबिक, उस समय उन्हें खुद भी यह नहीं पता था कि अखबारों में शादी को लेकर जो खबरें प्रकाशित हो रही हैं, उनमें कितनी सच्चाई है। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी से इस विषय पर चर्चा नहीं करने के लिए कहा गया था। सोहा ने यह भी याद किया कि उनकी फ्रेंच टीचर ने उन्हें इस शादी की खबर बताई थी।

शादी का फैसला आखिरी समय में हुआ था

सोहा और सबा ने बताया कि सैफ की शादी का फैसला काफी आखिरी समय में लिया गया था। उस वक्त दोनों काफी छोटी थीं, इसलिए परिवार में चल रही परिस्थितियों को पूरी तरह समझना उनके लिए आसान नहीं था। यही वजह थी कि वे अपने भाई की पहली शादी में शामिल नहीं हो सकीं। सैफ अली खान और अमृता सिंह की शादी 1991 में हुई थी। दोनों करीब 13 साल तक साथ रहे और 2004 में उनका तलाक हो गया। इसके बाद 2012 में सैफ ने अभिनेत्री करीना कपूर से शादी की।

पटौदी पैलेस में भी नहीं मिली 'शाही' जिंदगी

शो के दौरान सोहा और सबा ने अपने बचपन से जुड़े कई किस्से भी सुनाए। दोनों ने बताया कि उन्होंने अपने भाई सैफ के साथ पटौदी परिवार के महल में बचपन का काफी समय बिताया, लेकिन घर में उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं कराया गया कि वे किसी शाही परिवार का हिस्सा हैं। सोहा ने बताया कि उनके पिता और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी बच्चों को पैसों और खर्च की अहमियत समझाते थे। घर में बिजली बचाने को लेकर भी काफी सख्ती थी। वह पीले रंग के पोस्ट-इट नोट्स लगाकर बच्चों को लाइट बंद करने की याद दिलाते थे। इतना ही नहीं, दोस्तों के घर जाने की अनुमति भी कई बार इसलिए नहीं मिलती थी क्योंकि उनके पिता को लगता था कि वहां जाने में पेट्रोल का अनावश्यक खर्च होगा।

100 रुपये थी पॉकेट मनी, सैफ कर लेते थे पैसे 'उधार'

सबा ने बताया कि बचपन में उन्हें और सोहा को पॉकेट मनी के तौर पर 100 रुपये मिलते थे। उस समय सैफ इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे। बातचीत में सोहा ने मजाक करते हुए कहा कि सैफ कभी-कभी उनके पैसे ले लिया करते थे। सबा ने इस किस्से को आगे बढ़ाते हुए बताया कि जब वे इंग्लैंड जाती थीं, तब उन्हें 5 पाउंड मिलते थे। सैफ कई बार ये पैसे उनसे उधार ले लेते थे। मजेदार बात यह थी कि कुछ मौकों पर वह उनके पर्स से पैसे निकाल लेते और बाद में रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट के तौर पर वापस कर देते थे।

सैफ, सोहा और सबा के ये किस्से बताते हैं कि पटौदी परिवार की परवरिश में शाही विरासत के साथ-साथ बचत, अनुशासन और पैसों की अहमियत को भी खास जगह दी गई थी।

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