परेश रावल ने बताया क्यों छोड़ी सांसद की कुर्सी, बोले- झूठा नहीं बनना चाहता था

परेश रावल ने बताया कि राजनीति में सक्रिय होने के दौरान उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की समस्या थी, लेकिन राजनीति में आने के बाद दवाइयों की संख्या बढ़ गई।;

Update: 2026-07-17 09:53 GMT

मुंबई: बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल ने अपने राजनीतिक सफर और उससे दूरी बनाने के फैसले पर खुलकर बात की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचने वाले परेश रावल का कहना है कि राजनीति बाहर से जितनी आसान दिखाई देती है, वास्तविकता उससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीति में आने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि यह क्षेत्र उनके स्वभाव और कार्यशैली के अनुकूल नहीं था। अभिनेता ने कहा कि राजनीति में केवल पद हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करना और व्यवस्था को समझना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

‘राजनीति में आने के बाद बढ़ गया ब्लड प्रेशर’

परेश रावल ने बताया कि राजनीति में सक्रिय होने के दौरान उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) की समस्या थी, लेकिन राजनीति में आने के बाद दवाइयों की संख्या बढ़ गई। उनके अनुसार, आम लोगों को लगता है कि नेताओं का जीवन बेहद आरामदायक होता है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि लगातार दौरे, बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के कारण काम का दबाव काफी अधिक रहता है।

‘नेताओं की जिंदगी उतनी आसान नहीं जितनी दिखती है’

अभिनेता ने कहा कि राजनीति को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर यह माना जाता है कि नेता आरामदायक जीवन जीते हैं, लेकिन जब उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र में काम किया तो उन्हें महसूस हुआ कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण और समय मांगने वाला दायित्व है। परेश रावल के अनुसार, जनप्रतिनिधि बनने के बाद लोगों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ जाती हैं और हर समस्या के समाधान की जिम्मेदारी भी उसी पर आ जाती है।

व्यवस्था की जानकारी न होना बना सबसे बड़ा कारण

परेश रावल ने स्वीकार किया कि राजनीति छोड़ने का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक व्यवस्था की गहरी समझ का अभाव था। उन्होंने कहा कि लोग उनसे अपने काम कराने की उम्मीद लेकर आते थे, लेकिन उन्हें स्वयं सरकारी प्रक्रियाओं और व्यवस्था के संचालन की पूरी जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि कई बार लोगों से यह कह देते थे कि उनका काम हो जाएगा, लेकिन बाद में जब वह पूरा नहीं हो पाता था तो उन्हें असहज महसूस होता था। उन्हें लगा कि यदि वह बार-बार ऐसे आश्वासन देते रहे तो अनजाने में गलत बातें कहने लगेंगे।

‘मैं बेईमान नहीं बनना चाहता था’

 अभिनेता ने कहा कि उन्हें यह महसूस होने लगा था कि यदि वह राजनीति में बने रहे तो उन्हें ऐसे वादे करने पड़ सकते हैं जिन्हें पूरा करना उनके बस में नहीं होगा। यह बात उनके व्यक्तिगत सिद्धांतों के खिलाफ थी। उन्होंने कहा कि वह अपने व्यक्तित्व में ऐसी आदतें विकसित नहीं करना चाहते थे जो उन्हें ईमानदारी से दूर ले जाएं। उनका मानना था कि यदि वह स्वयं के मूल्यों से समझौता करेंगे तो इसका असर उनके अभिनय और व्यक्तित्व दोनों पर पड़ेगा।

2014 में बने थे सांसद

परेश रावल ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में गुजरात की अहमदाबाद पूर्व संसदीय सीट से जीत दर्ज की थी। संसद सदस्य के रूप में उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया, लेकिन इसके बाद सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2019 में उन्होंने चुनावी राजनीति से हटकर पूरी तरह अभिनय और फिल्मी करियर पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।

अभिनय को ही बनाया अपनी प्राथमिकता

राजनीति छोड़ने के बाद परेश रावल फिर से पूरी तरह फिल्म उद्योग में सक्रिय हो गए। उन्होंने कई फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स में अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया और यह स्पष्ट किया कि अभिनय ही उनका वास्तविक पेशा और जुनून है। उनका कहना है कि हर क्षेत्र की अपनी चुनौतियां होती हैं और राजनीति में सफल होने के लिए पूर्ण समर्पण, धैर्य और व्यवस्था की गहरी समझ आवश्यक है।

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