2 साल से लाइमलाइट से दूर हैं मशहूर गायिका अलका याग्निक, किस बीमारी ने तोड़ा शरीर? छूटा काम

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद अलका याग्निक ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश जारी करते हुए अपने प्रशंसकों की चिंता और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया।;

Update: 2026-06-26 10:13 GMT

नई दिल्‍ली: 23 जून 2026 को आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में मशहूर पार्श्व गायिका अलका याग्निक को पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया। समारोह के दौरान जब उनका नाम सम्मान के लिए पुकारा गया तो पूरे सभागार ने तालियों से उनका स्वागत किया। हालांकि कार्यक्रम के बाद एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें अलका याग्निक व्हीलचेयर पर बैठकर बाहर जाती नजर आईं। इस दृश्य ने उनके प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ा दी। कई लोगों ने यह अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि क्या उनकी पहले से चली आ रही सुनने की बीमारी अब उनके चलने-फिरने या शरीर के संतुलन को भी प्रभावित कर रही है।

अलका याग्निक ने खुद दूर की सभी अटकलें

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद अलका याग्निक ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर एक संदेश जारी करते हुए अपने प्रशंसकों की चिंता और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया। गायिका ने कहा कि वह पूरी तरह ठीक हैं और धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही हैं। उन्होंने बताया कि पद्म पुरस्कार समारोह काफी लंबा और भावनात्मक रूप से यादगार रहा, जिसकी वजह से वह बेहद थक गई थीं। इसी कारण कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते समय उन्होंने सुविधा के लिए व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया। उन्होंने लोगों से अनावश्यक चिंता न करने की अपील करते हुए कहा कि उनकी तबीयत स्थिर है और वह लगातार बेहतर महसूस कर रही हैं।

2024 में सामने आई थी सुनने की बीमारी

अलका याग्निक ने जून 2024 में पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया था कि वह सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस (Sensorineural Hearing Loss) नामक बीमारी से जूझ रही हैं। यह सुनने की क्षमता से जुड़ी गंभीर समस्या है, जिसमें भीतरी कान की अत्यंत संवेदनशील कोशिकाएं या कान से मस्तिष्क तक ध्वनि पहुंचाने वाली तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस बीमारी के कारण व्यक्ति की सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। कई मामलों में यह समस्या स्थायी भी हो सकती है, क्योंकि क्षतिग्रस्त हो चुकी सूक्ष्म हेयर सेल्स दोबारा विकसित नहीं होतीं।

कैसे काम करता है सुनने का तंत्र?

सामान्य परिस्थितियों में ध्वनि तरंगें कान के पर्दे और मध्य कान से गुजरते हुए भीतरी कान के कोक्लिया (Cochlea) तक पहुंचती हैं। यहां मौजूद सूक्ष्म हेयर सेल्स ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजती हैं। मस्तिष्क इन संकेतों को समझकर हमें आवाज सुनने का अनुभव कराता है। यदि किसी कारण से ये हेयर सेल्स या श्रवण तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाएं तो ध्वनि का संचार प्रभावित हो जाता है और सुनने की क्षमता कम होने लगती है।

कान केवल सुनने का अंग नहीं है

विशेषज्ञों के अनुसार, कान केवल सुनने का माध्यम नहीं है। भीतरी कान में मौजूद वेस्टिब्युलर सिस्टम (Vestibular System) शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। जब हम चलते हैं, दौड़ते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या सिर को किसी दिशा में घुमाते हैं, तब यही प्रणाली लगातार मस्तिष्क को संकेत भेजती रहती है। मस्तिष्क इन संकेतों की तुलना आंखों और मांसपेशियों से मिलने वाली जानकारी से करता है और शरीर को संतुलित बनाए रखता है। यदि यह प्रणाली बीमारी, संक्रमण, सूजन या तंत्रिकाओं की क्षति के कारण प्रभावित हो जाए, तो व्यक्ति को चक्कर आना, अस्थिरता महसूस होना, लड़खड़ाकर चलना या बार-बार गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हर मरीज में नहीं होती संतुलन की समस्या

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑडियोलॉजी के अनुसार, उम्र बढ़ना, लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहना, वायरल संक्रमण, सिर में चोट या आनुवंशिक कारण सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस की वजह बन सकते हैं। हालांकि हर मरीज में शरीर का संतुलन प्रभावित नहीं होता। यदि बीमारी केवल सुनने वाली कोशिकाओं तक सीमित रहे, तो व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर सकता है। लेकिन यदि वेस्टिब्युलर सिस्टम भी प्रभावित हो जाए, तब संतुलन संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। अलका याग्निक के मामले में फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि उनकी बीमारी ने उनके संतुलन को प्रभावित किया हो। स्वयं उन्होंने स्पष्ट किया है कि व्हीलचेयर का इस्तेमाल केवल अत्यधिक थकान की वजह से किया गया था।

सुनने की क्षमता कम होने से क्यों बढ़ सकता है गिरने का खतरा?

चिकित्सकों के अनुसार, सुनने की क्षमता केवल बातचीत तक सीमित नहीं होती। हमारा मस्तिष्क आसपास की आवाजों की मदद से वातावरण का एक मानसिक नक्शा तैयार करता है, जिससे हमें अपनी स्थिति और दिशा का सही अंदाजा मिलता है। जब सुनने की क्षमता कम होने लगती है, तो यह प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके साथ ही बातचीत समझने और आवाजों को पहचानने के लिए मस्तिष्क को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस अतिरिक्त मानसिक प्रयास को कॉग्निटिव लोड कहा जाता है। जब मस्तिष्क का अधिक ध्यान ध्वनियों को समझने में लगने लगता है, तो शरीर के संतुलन और समन्वय बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत कम संसाधन उपलब्ध रहते हैं। यही कारण है कि कुछ लोगों में गिरने या असंतुलन का जोखिम बढ़ सकता है।

कानों की सेहत को नजरअंदाज न करें

अलका याग्निक का वायरल वीडियो भले ही केवल थकान का परिणाम रहा हो, लेकिन इसने एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संदेश जरूर दिया है। कानों से जुड़ी समस्याएं केवल सुनने की क्षमता तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि कई बार शरीर के संतुलन और रोजमर्रा की गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार सुनने में कठिनाई, चक्कर आना, चलते समय अस्थिरता महसूस होना या बार-बार गिरने जैसी समस्याएं हों, तो उन्हें इन्हें सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते ईएनटी विशेषज्ञ या ऑडियोलॉजिस्ट से जांच और उचित उपचार कराना भविष्य में गंभीर जटिलताओं से बचने में मदद कर सकता है।

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