छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर बॉलीवुड की तीखी प्रतिक्रिया, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदर्शन के दौरान सामने आई तस्वीरों पर दुख जताया। उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की तस्वीरें लंबे समय तक उन्हें विचलित करती रहेंगी।;

Update: 2026-07-21 06:09 GMT

मुंबई/ नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए विरोध मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और झड़पों के बाद बॉलीवुड से जुड़े कई कलाकारों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर सोनू सूद, हुमा कुरैशी, अनुराग कश्यप, आयुष शर्मा, भूमि पेडनेकर, विशाल ददलानी और अन्य कलाकारों ने छात्रों के साथ हुई घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। अधिकांश कलाकारों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

हुमा कुरैशी ने कहा- संवाद से सुलझ सकते थे हालात

अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रदर्शन के दौरान सामने आई तस्वीरों पर दुख जताया। उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की तस्वीरें लंबे समय तक उन्हें विचलित करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों को अधिक धैर्य, बातचीत और लोगों की बात सुनकर संभाला जा सकता था। हुमा ने यह भी लिखा कि लोकतंत्र में नागरिकों को सवाल पूछने और जवाबदेही की अपेक्षा रखने का अधिकार है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और नागरिकों के साहस को सम्मान देने की बात कही।

विशाल ददलानी ने चुप्पी पर जताई नाराजगी

गायक और संगीतकार विशाल ददलानी ने भी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म उद्योग के उन लोगों पर भी नाराजगी जाहिर की, जो इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कलाकारों से सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने की अपील की।

आयुष शर्मा बोले— लोकतंत्र में हर आवाज सुनी जानी चाहिए

अभिनेता आयुष शर्मा ने कहा कि किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान केवल मतदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर नागरिक की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना भी उसकी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सरकार द्वारा बातचीत की पहल सकारात्मक संकेत है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान छात्रों को आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जो चिंता का विषय है।

सोनू सूद और अनुराग कश्यप ने भी जताई चिंता

अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर संक्षिप्त लेकिन भावनात्मक संदेश साझा करते हुए लिखा, "हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।" वहीं फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने पोस्ट में लिखा कि किसी भी व्यवस्था में आदेशों के पालन के साथ नैतिक जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कानून-व्यवस्था लागू करने के तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए।

भूमि पेडनेकर ने शिक्षा सुधारों की जरूरत बताई

अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने कहा कि किसी भी आंदोलन को हिंसा से दूर रखना जरूरी है और लोकतांत्रिक समाज में बातचीत ही सबसे प्रभावी समाधान है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की कमियां, समान अवसरों की कमी, शिक्षकों की उपलब्धता और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की अपील की।

अन्य कलाकारों ने भी रखी अपनी राय

अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं यूट्यूबर एल्विश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन छात्रों के साथ हिंसा उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान निकाला जाना चाहिए।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों में कई बार हुई झड़प

सोमवार को CJP ने सुबह जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पुलिस के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे। दिनभर चले घटनाक्रम में कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। संसद क्षेत्र की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग किया। बाद में कुछ स्थानों पर पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। घटनाक्रम के दौरान कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई। सुरक्षा कारणों से संसद भवन के मुख्य प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।

शिक्षा सुधारों पर बहस हुई तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक ओर कलाकारों और सामाजिक हस्तियों ने छात्रों की आवाज सुनने और संवाद को प्राथमिकता देने की बात कही, वहीं प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।

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