मुंबई: फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ इन दिनों रिलीज से पहले ही पेड प्रिव्यू और एडवांस बुकिंग को मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया के कारण सुर्खियों में है। फिल्म में नेता जमील जमाली का किरदार निभा रहे अनुभवी अभिनेता राकेश बेदी भी इस सफलता से उत्साहित हैं। उन्होंने फिल्म को मिल रही प्रतिक्रिया, अपने करियर के अहम मोड़ों और इंडस्ट्री में आए बदलावों पर खुलकर बात की।
पेड प्रिव्यू और एडवांस बुकिंग पर क्या बोले?
राकेश बेदी का मानना है कि फिल्म को मिल रही शुरुआती प्रतिक्रिया अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी इतनी मजबूत एडवांस बुकिंग या पेड प्रिव्यू की उम्मीद नहीं की थी। उनके अनुसार, “जब हम पहले पार्ट की शूटिंग कर रहे थे, तब जरूर लग रहा था कि कुछ अलग और खास बन रहा है, लेकिन इस तरह का रिस्पॉन्स मिलेगा, यह सोचा नहीं था।” उन्होंने यह भी कहा कि आजकल दर्शक सिनेमाघरों में जाने से पहले काफी सोचते हैं, क्योंकि फिल्मों का ओटीटी पर जल्दी आ जाना भी एक बड़ा कारण है। ऐसे में प्रोडक्शन का पेड प्रिव्यू का फैसला फिल्म की संभावनाओं को परखने के लिहाज से अहम माना जा सकता है।
सफलता के बाद बदले फैसले और फीस
जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने अपनी फीस या स्क्रिप्ट चुनने के तरीके में बदलाव किया है, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा करना जरूरी है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “अगर मैं ऐसा नहीं करूंगा, तो मुझसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पहले भी अच्छी स्क्रिप्ट ही चुनते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ में उनका छोटा सा रोल ही उन्हें ‘धुरंधर’ तक लेकर आया। उस एक सीन ने निर्देशक आदित्य धर को प्रभावित किया और आगे उन्हें बड़ा मौका मिला। व्यक्तिगत जीवन पर बात करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि घर में उनका स्टारडम नहीं चलता, हाल ही में उन्हें पत्नी और बेटी की डांट भी सुननी पड़ी क्योंकि वह गलती से कार की चाबी साथ ले गए थे।
‘चश्मे बद्दूर’ से करियर को मिला मोड़
राकेश बेदी ने अपने करियर के अहम पड़ावों पर बात करते हुए फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म न केवल उनके लिए, बल्कि कई कलाकारों, निर्देशकों और लेखकों के लिए प्रेरणास्रोत रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने डेविड धवन के साथ कई फिल्में कीं, जिनमें उनके किरदार लोकप्रिय हुए, लेकिन एक समय के बाद उन्हें कॉमेडी रोल्स तक सीमित कर दिया गया। उन्होंने कहा, उस दौर में फिल्में हीरो के इर्द-गिर्द घूमती थीं। चरित्र कलाकारों को वह पहचान या अवॉर्ड नहीं मिलते थे, जिसके वे हकदार थे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब इंडस्ट्री में सकारात्मक बदलाव आया है और प्रतिभा को सही पहचान मिलने लगी है।
ट्रेलर का ‘बतख वाला सीन’ कैसे बना खास?
‘धुरंधर: द रिवेंज’ के ट्रेलर में उनके एक खास सीन, जिसे ‘बतख वाला सीन’ कहा जा रहा है को लेकर भी उन्होंने दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि यह सीन बैंकॉक में शूट किया गया था और मूल रूप से यह एक गंभीर सीन था, जिसमें बड़े किरदार मौजूद थे और उनका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, मैं सीन में देर से पहुंचता हूं, तो मैंने सोचा कि मुझे चापलूसी करनी चाहिए। मैंने वह लाइन खुद से जोड़ी थी। शुरुआत में सेट पर सभी इस लाइन पर हंसे, और निर्देशक आदित्य धर को भी यकीन नहीं था कि यह सीन फिल्म में रहेगा या नहीं। लेकिन एडिटर को यह इतना पसंद आया कि उसे फाइनल कट में शामिल कर लिया गया।
बॉक्स ऑफिस क्लैश टलना फायदेमंद
फिल्म ‘टाक्सिक’ के साथ संभावित टकराव पर बात करते हुए राकेश बेदी ने कहा कि उन्हें हाल ही में इस फिल्म के बारे में पता चला था और बाद में जानकारी मिली कि इसकी रिलीज टाल दी गई है। उन्होंने कहा, “टकराव नहीं होना अच्छी बात है, क्योंकि इससे दर्शक बंट जाते हैं।”
सफलता के बाद बढ़ती निगाहें और दबाव
फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा के उस बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि सफल लोगों की गलतियों का इंतजार किया जाता है। राकेश बेदी ने सहमति जताते हुए कहा कि इंडस्ट्री में यह आम बात है कि जो व्यक्ति सफल होता है, उस पर सभी की नजरें रहती हैं। उन्होंने कहा, लोग चाहते हैं कि वह कोई गलती करे और उसे पकड़ लिया जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग दूसरों की सफलता को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते और तुलना करने लगते हैं।
बड़े रोल का इंतजार नहीं, अच्छे किरदार जरूरी
अपने करियर के वर्तमान चरण पर बात करते हुए राकेश बेदी ने कहा कि वह अब केवल बड़े बैनर या लंबे रोल का इंतजार नहीं करते। उनका मानना है कि किसी भी किरदार का महत्व उसकी अवधि से नहीं, बल्कि कहानी में उसके योगदान से तय होता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक फिल्म में सिर्फ 6–7 दिन काम किया, लेकिन किरदार इतना मजबूत था कि उन्हें संतोष मिला।
कलाकार की असली पहचान
‘धुरंधर: द रिवेंज’ को मिल रही शुरुआती सफलता के बीच राकेश बेदी के विचार न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव को दर्शाते हैं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप को भी सामने लाते हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि समय के साथ खुद को ढालना, मौके को पहचानना और छोटे-से-छोटे किरदार को भी पूरी ईमानदारी से निभाना ही एक कलाकार की असली पहचान है।