बिजली कंपनियां बना रही हैं दबाव

बिजली कंपनियों ने दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग में वृद्घि के प्रस्ताव जमा करवाए हैं;

Update: 2017-07-27 13:14 GMT

नई दिल्ली (देशबन्धु)। बिजली कंपनियों ने दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग में वृद्घि के प्रस्ताव जमा करवाए हैं और अब उन्होने यह तर्क देते हुए वृद्घि के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है। उनमें से 12 ऐसे राज्य हैं, जहां बिजली की दरों में 31 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन दिल्ली में 2014 से लेकर अभी तक कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस वजह से दिल्ली डिस्कॉम्स का राजस्व अंतर 34 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक हो गया है। 

जानकार बताते हैं कि सामान्य भाषा में, राजस्व अंतर एक ऐसी रकम है, जिसे दिल्ली के 50 लाख से अधिक उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के क्रम में खर्च किया जा चुका है, लेकिन इस खर्च की भरपाई या वसूली अभी तक नहीं हुई है। यानी, भविष्य में बिजली उपभोक्ताओं से इस रकम वसूली की जानी है। बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक यह अंतर इसलिए खड़ा हुआ है, क्योंकि पिछले वर्षों में लागत के हिसाब से बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई और उसे भविष्य पर छोड़ दिया गया। आखिरी बार, जुलाई 2014 मेें दिल्ली में बिजली की दरों में पांच प्रतिशत वृद्घि की थी जो कि वित्त वर्ष 2014-15 के लिए थी। उसके बाद से कोई टैरिफ ऑर्डर नहीं आया है। 
     

जानकार बताते हैं कि अगर सिर्फ  वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान डिस्कॉम्स के रेवेन्यू गैप की बात करें, तो यह लगभग 1600 करोड़ रूपये का है। वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान टीपीडीडीएल का राजस्व अंतर करीब 1355 करोड़ रूपये, बीआरपीएल का 1063 करोड़ रूपये का है और बीवाईपीएल का करीब राजस्व अंतर 523 करोड़ रूपये का है। पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक दरें बढ़ी हैं, यहां बिजली की दरों में कुल 31.4 प्रतिशत की वृद्घि हुई है।

मध्य प्रदेश में 27.7 प्रतिशत, बिहार में 22.9 प्रतिशत, झारखंड में 20.2 प्रतिशत और गोवा में 18.9 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। वहीं जानकार मानते हैं कि उदय योजना से 75 पैसे प्रति यूनिट तक दरें कम हो सकती हैं। उदय स्कीम के तहत डिस्कॉम्स के लिए लोन की ब्याज दरों को घटाकर उन्हें 7 - 8.5 प्रतिशत तक लाया गया है। लेकिन, दिल्ली डिस्कॉम्स को इस स्कीम का लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उनके लिए उदय स्कीम लागू ही नहीं है। यदि दिल्ली डिस्कॉम्स को उदय स्कीम में शामिल किया जाए, तो उन पर लोन की ब्याज दरों का बोझ 4 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली में बिजली की दरों में करीब 75 पैसे प्रति यूनिट की कमी आ सकती है। इससे बिजली खरीद की कीमतों में भी कमी आएगी, जिससे भविष्य में भी बिजली की दरें कम बनी रहेंगी।
 

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