छात्रों को दी गई सांपों की जानकारियां
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के वानिकीए वन्यजीव एवं पर्यावरण विज्ञान के द्वारा साँपों पर जागरूकता हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया
बिलासपुर। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के वानिकीए वन्यजीव एवं पर्यावरण विज्ञान के द्वारा साँपों पर जागरूकता हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रकार के सापों की पहचान कैसे की जाए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोण् एसण् एसण् सिंह ने सापों की विविधताए पहचानए संरक्षण एवं लोगों में उनके प्रति जागरूकता के विषय में बतलाया। कार्यक्रम के अतिथि नारूप पारचे, रक्षक एनजीओ ने सापों को पहचानने के तरीकों, वैश्विक परिवेश में सापों के विलुप्त होती प्रजातियों के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की।
शुभम टंडन एवं उनके साथियों ने पॉवरपॉइंट के माध्यम से भारत में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के सर्पों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बतलाया कि धरती पर मानव की उत्पत्ति से करीब 100 वर्ष पूर्व सापों का आगमन हो चुका था एवं वर्तमान समय में विश्व में सापों की लगभग 3600 प्रजातियों की पहचान हो चुकी हैए जिनमें से भारत में लगभग 285 प्रकार के साँप पाए जाते हैं।
लगभग 60 प्रजातियाँ अत्यधिक विषैली हैं जिनमें इंडियन कोबराए करैतए रसेल वाईपर एवं सॉ स्केल वाईपर प्रमुख है तथा बाकी अधिकतर साँप विषहीन होते हैं। सांप कभी भी अकारण किसी पर आक्रमण नहीं करते एवं इनसे जुडी हुई गलत भ्रांतियों के बारें में भी विस्तृत जानकारी दी गई। साँप से हुए दंश के प्राथमिक उपचार एवं इनके प्रति जागरूकता एवं संरक्षण पर बल दिया गया।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं वानिकी विभाग के लगभग 150 से अधिक छात्र छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डा. एस.एस. धुरिया ने की विभाग के अन्य शिक्षक डा रश्मि अग्रवालए डा एसण् सीण् तिवारीए डा. के. के.चंद्रा, डा. गरिमा तिवारी,डा. अजय कुमार सिंह, डा. अरविन्द प्रजापति, डा. अशोक मिंज, आलोक चंद्राकर एवं विभाग के छात्र. छात्राओं ने कार्यक्रम कों सफल बनाने में अपना संपूर्ण योगदान दिया।