डेंटिस्ट, फिल्म स्टडीज की पढ़ाई कर चुकीं 29 वर्षीय नवकिरण किसानों के समर्थन में बॉर्डर पर मौजूद

कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन में बुजुर्ग, नौजवान महिला हर कोई शामिल है। इतना ही नहीं, कुछ अपने रोजगार छोड़ कर किसानों के आंदोलन में अपना समर्थन दे रहे हैं

Update: 2021-03-16 00:18 GMT

नई दिल्ली। कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन में बुजुर्ग, नौजवान महिला हर कोई शामिल है। इतना ही नहीं, कुछ अपने रोजगार छोड़ कर किसानों के आंदोलन में अपना समर्थन दे रहे हैं, ऐसी ही एक 29 वर्षीय नवकिरण नाथ की कहानी है जो कि बीते 3 महीनों से टिकरी बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में बैठी हुई है। नवकिरण डेंटिस्ट रह चुकीं है, हालांकि उन्होंने 3 साल प्रैक्टिस करने के बाद वह प्रोफेशन छोड़ दिया, जिसके बाद उन्होंने फिल्म स्टडीज से मास्टर्स की। टिकरी बॉर्डर पर नवकिरण के साथ उनका पूरा परिवार मौजूद है।

आंदोलन में जुड़ने से पहले वे फिल्म स्टडीज से जुड़े एक प्रोजेक्ट में इंटर्नशिप कर रही थीं, जिसे छोड़ वो आंदोलन में शामिल हुई।

नवकिरण नाथ ने आईएएनएस को बताया कि, "मैंने बीडीएस की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी से की वहीं 3 साल डेंटिस्ट की प्रैक्टिस भी की लेकिन अनुभव अच्छा नहीं रहा। कुछ वक्त बाद फिल्म स्टडीज का कोर्स किया था। फिलहाल किसानों के आन्दोलन में शुरूआत से ही टिकरी बॉर्डर पर मौजूद हूं।"

उन्होंने आगे बताया कि, "बतौर यूथ हम किस तरह किसानों को समर्थन दे सकते थे इस पर हमने काफी सोचा शुरूआत में वॉल पेंटिंग कर अपना समर्थन देते रहे, फिर हमने तीनो सीमाओं की पहली लाइब्रेरी खोली जिसका नाम शहीद भगत सिंह लाइब्रेरी नाम रखा।"

हालांकि किसानों के लिए टिकरी बॉर्डर पर ट्रॉली टाकीज नाम से फिल्म दिखाने के लिए खोला गया। हर शाम किसानों को टॉकीज में फिल्म दिखाई जाती थी। इसमें भी नवकिरण का योगदान रहा।

बॉर्डर पर ट्रॉली टाइम्स के नाम से अखबार भी बांटा जाता रहा है, नवकिरण इस अखबार की एडिटोरियल टीम की सदस्य भी हैं।

सरकार और किसानों के बीच अब तक 11 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन सभी विफल रही। सरकार अपनी तरफ से स्प्ष्ट कर चुकी है कि कानून वापसी नहीं होंगे, हालांकि संशोधन किए जा सकते हैं। लेकिन किसान वापसी की मांग पर अड़े हुए हैं।

दरअसल तीन नए अधिनियमित खेत कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम2020 पर किसान सशक्तिकरण और संरक्षण समझौता हेतु सरकार का विरोध कर रहे हैं।

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