जामिया यूनिवर्सिटी में बवाल के बीच इमरान मसूद हिरासत में, 'फ्री कश्मीर' नारों पर सियासत तेज

छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच विवादित नारों ने बढ़ाया तनाव, एबीवीपी ने FIR और जांच की मांग उठाई;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-10-23 16:42 GMT

नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस तथ्य पर देश में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ घटनाओं को आंदोलन की छवि खराब करने के लिए उछाला जा रहा है।

जामिया कैंपस में हंगामा, इमरान मसूद हिरासत में; विवादित नारों पर मचा घमासान

जानकारी के अनुसार, जामिया परिसर में कथित तौर पर "फ्री कश्मीर" और "फ्री शरजील इमाम" जैसे नारे लिखे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इन नारों के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसमें इमरान मसूद भी शामिल हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

उधर, छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच परिसर में "फ्री कश्मीर" और "डेथ टू एबीवीपी" जैसे कथित नारों के लिखे जाने की शिकायत सामने आई है। इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

'कश्मीर भारत का अभिन्न अंग', हिरासत में लिए जाने के बाद बोले इमरान मसूद

एबीवीपी का कहना है कि आंदोलन के दौरान लिखे गए विवादित नारों और कथित आपत्तिजनक संदेशों की जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके। संगठन ने यह भी कहा कि छात्रसंघ की मांग लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जानी चाहिए और किसी भी छात्र संगठन के खिलाफ नफरत फैलाने वाली भाषा स्वीकार्य नहीं है।

वहीं, जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी छात्र तीन प्रमुख मांगें उठा रहे हैं। इनमें छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करना, आंदोलन में शामिल छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना और विश्वविद्यालय के सिक्योरिटी एडवाइजर व चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाना शामिल है।

जामिया में नारे, प्रदर्शन और हिरासत... एक साथ कई विवादों के केंद्र में यूनिवर्सिटी

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने छात्रों की मांगों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। समिति के अनुसार, छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई है। प्रशासन का कहना है कि संविधान तैयार होने के बाद ही छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

समिति ने यह भी कहा है कि 12 अक्टूबर 2026 के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, सुरक्षा कर्मियों के लिए आचार संहिता तैयार करने और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देने की सिफारिश भी की गई है। प्रशासन ने छात्रों से आंदोलन समाप्त कर संवाद के जरिए समाधान निकालने में सहयोग की अपील की है।

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