नई दिल्ली: देश में शिक्षा व्यवस्था और कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर जारी आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से चल रहा अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। देर रात उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बातचीत और सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद यह निर्णय लिया। वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे थे। लंबी बातचीत के बाद उन्होंने जूस ग्रहण कर अपना अनशन समाप्त किया।
लिखित भरोसे के बाद बनी सहमति
सोनम वांगचुक के अनुसार सरकार और उनके प्रतिनिधियों के बीच पिछले दो दिनों से लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन उनके लिए पर्याप्त नहीं था। वे चाहते थे कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को लिखित रूप में दर्ज करे। उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्हें दो दिन अतिरिक्त अनशन जारी रखना पड़ा। अंततः सरकार ने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन के इस चरण को समाप्त करने का फैसला लिया।
सरकार ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर दिया लिखित आश्वासन
वांगचुक ने बताया कि सरकार ने तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखित सहमति दी है।
पहला, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले अथवा संसद मार्च में शामिल विद्यार्थियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं करने का आश्वासन दिया गया है। दूसरा, कथित पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित उन परिवारों के लिए उचित सहायता और मुआवजे पर विचार किया जाएगा, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। तीसरा, संसद में परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार और इस पूरे मामले पर व्यापक चर्चा कराने का आश्वासन दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर स्पष्ट आश्वासन नहीं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस विषय पर कोई स्पष्ट या लिखित आश्वासन नहीं दे सकी।उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चितकाल तक भूख हड़ताल जारी रखकर अपने स्वास्थ्य और जीवन को खतरे में डालें, या आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं स्वस्थ रहकर संघर्ष जारी रखें। वांगचुक ने कहा कि पिछले कई सप्ताह से देशभर के लोग उनसे लगातार आग्रह कर रहे थे कि आंदोलन की सफलता के लिए उनका जीवित और सक्रिय रहना अधिक आवश्यक है।
END OF HUNGER... BEGINNING OF ACCOUNTABILITY...!
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 24, 2026
Sonam Wangchuk ends his fast after 26 days upon getting assurance from the government and members of parliament of all political parties that the issue of accountability in the failing examination system will be discussed on the… pic.twitter.com/0C9YX5VlsL
छात्रों का भविष्य सबसे बड़ी प्राथमिकता
सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्रों का भविष्य था। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र के खिलाफ दर्ज होने वाली एफआईआर उसके पूरे करियर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने लद्दाख में कई ऐसे उदाहरण देखे हैं, जहां कानूनी मामलों के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। इसी वजह से उन्होंने सबसे पहले यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो।
सरकार के लिए भी अहम संदेश
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर वांगचुक ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह सरकार का विषय है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार समय रहते उचित राजनीतिक निर्णय लेती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।
देशवासियों का जताया आभार
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने आंदोलन के दौरान मिले व्यापक जनसमर्थन के लिए देशभर के नागरिकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के समर्थन और सकारात्मक सुझावों ने उन्हें कठिन समय में हौसला दिया। उनका विश्वास है कि यदि सरकार और समाज मिलकर गंभीरता से शिक्षा सुधार की दिशा में काम करें, तो भविष्य में छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अब संसद और नीति सुधार पर निगाहें
अनशन समाप्त होने के साथ आंदोलन का यह चरण भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा किए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं। यदि संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पारदर्शिता को लेकर व्यापक चर्चा होती है तथा आवश्यक सुधार लागू किए जाते हैं, तो इसे इस आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाना सबसे बड़ी आवश्यकता होगी।