Delhi News: सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी का तंज, जहां नीयत नहीं, वहां जवाबदेही भी नहीं

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद अक्सर कुछ छोटे अधिकारियों पर जिम्मेदारी डाल दी जाती है, जबकि व्यवस्था के स्तर पर जवाबदेही तय करने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने सत्य निकेतन हादसे को इसी कथित लापरवाही से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही।;

Update: 2026-09-07 13:03 GMT

नई दिल्ली: राजधानी के सत्य निकेतन इलाके में PG बिल्डिंग गिरने की घटना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस हादसे को लेकर बीजेपी और सरकार पर निशाना साधते हुए प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सरकार का एक ‘शर्मनाक पैटर्न’ बन गया है, जिसमें हादसे से पहले रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता और घटना के बाद बयानबाजी शुरू हो जाती है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद अक्सर कुछ छोटे अधिकारियों पर जिम्मेदारी डाल दी जाती है, जबकि व्यवस्था के स्तर पर जवाबदेही तय करने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने सत्य निकेतन हादसे को इसी कथित लापरवाही से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगने की बात कही।

सैदुलाजाब और हौज रानी की घटनाओं का भी जिक्र

राहुल गांधी ने कहा कि सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। उन्होंने पिछले चार महीनों में दिल्ली में हुई अन्य घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सैदुलाजाब में हुई एक घटना में छह लोगों की मौत हुई, जबकि हौज रानी में आग लगने से 22 लोगों की जान चली गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि हर ऐसी घटना के बाद परिवारों को अपूरणीय नुकसान झेलना पड़ता है। उनके मुताबिक लोगों की जिंदगियां, सपने और भविष्य मलबे या हादसों की भेंट चढ़ जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद व्यवस्था फिर पहले की तरह चलने लगती है।

‘जवाबदेही मांगने वालों को बदनाम किया जाता है’

राहुल गांधी ने सरकार से जवाबदेही मांगने के मुद्दे पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष या आम लोग सरकार से सवाल करते हैं तो उन्हें अलग-अलग अपमानजनक विशेषणों के जरिए निशाना बनाया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा या बदनाम करने की कोशिश के बजाय सरकार को यह बताना चाहिए कि हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए और जिम्मेदारी किसकी थी।

‘दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार, फिर लाचारी क्यों?’

राहुल गांधी ने दिल्ली की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी बीजेपी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार होने के बावजूद अगर ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती हैं तो फिर प्रशासनिक स्तर पर लाचारी किस बात की है। उन्होंने कहा कि समस्या ‘नीयत’ की है और जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय से बड़े-बड़े मुद्दों और दावों की बात करती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़े सवालों का पर्याप्त समाधान नहीं हुआ।

हादसे के बाद बचाव दलों से राहुल की अपील

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने सत्य निकेतन हादसे के बाद बचाव अभियान में जुटी एजेंसियों से हर संभव प्रयास करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बचाव दल एक-एक छात्र तक पहुंचने की कोशिश करें और घायलों को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ता मौके पर मौजूद हैं और प्रभावित लोगों की मदद के लिए तैयार हैं। राहुल गांधी ने पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े होने की बात कहते हुए छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की थी।

PG में बड़ी संख्या में छात्रों के रहने पर सवाल

राहुल गांधी ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि हॉस्टल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई छात्र निजी PG में रहने को मजबूर होते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि कुछ PG में सीमित जगह के भीतर बड़ी संख्या में छात्रों को रखा जाता है और कई बार सुरक्षा मानकों की पर्याप्त जांच नहीं होती। ऐसे में भवन की मजबूती, फायर सेफ्टी, निकासी व्यवस्था और अधिकृत निर्माण जैसे मुद्दों की नियमित निगरानी जरूरी हो जाती है।

MCD की जिम्मेदारी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने सत्य निकेतन हादसे को लेकर कई सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। पार्टी के मुताबिक इलाके में होने वाले निर्माण और मरम्मत कार्य नियमों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी निगरानी MCD की जिम्मेदारी है। MCD के पास बिना मंजूरी होने वाले निर्माण और मरम्मत के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि अनधिकृत निर्माण या नियमों के उल्लंघन की समय रहते पहचान कर कार्रवाई की जाती तो संभावित खतरे को कम किया जा सकता था।

जिला प्रशासन और फायर विभाग की भूमिका भी सवालों में

कांग्रेस ने जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। पार्टी के मुताबिक जिलाधिकारी को ऐसी इमारतों की पहचान और निगरानी के अधिकार दिए गए हैं जिनका इस्तेमाल उनके स्वीकृत उपयोग से अलग तरीके से हो रहा हो। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी रिहायशी संपत्ति का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा था, तो उसे नियमों के तहत जांच और कार्रवाई के दायरे में लाना प्रशासन की जिम्मेदारी थी। वहीं, अग्निशमन विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस के अनुसार यदि 15 मीटर से अधिक ऊंची इमारत और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को देखते हुए फायर सेफ्टी मानकों और जरूरी NOC की जांच समय पर की गई होती, तो जोखिम का पहले पता लगाया जा सकता था।

सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी और सरकारी एजेंसियों की निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल सिर्फ हादसे के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से कितनी प्रभावी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।

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