नेतन्याहू का बड़ा ऐलान: लेबनान से सीधी वार्ता को मंजूरी
ईरान-इजरायल तनाव के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है
सीजफायर पर संकट, इजरायल-लेबनान वार्ता से उम्मीदें
- हिज्बुल्लाह को हथियारमुक्त करने की तैयारी, शांति की ओर कदम
- ट्रंप-नेतन्याहू बातचीत: हमले रोकने की अपील
- लेबनान का पलटवार, संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ शिकायत
नई दिल्ली। ईरान-इजरायल तनाव के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ जल्द से जल्द सीधी वार्ता शुरू करने की मंजूरी दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब क्षेत्र में लागू सीजफायर लगातार हमलों के कारण कमजोर पड़ता दिख रहा है।
नेतन्याहू ने कैबिनेट को निर्देश दिया है कि लेबनान की बार-बार की मांग को देखते हुए बातचीत शुरू की जाए। उनके दफ्तर से जारी बयान में कहा गया कि वार्ता का मुख्य उद्देश्य हिज्बुल्लाह को हथियारों से मुक्त करना और दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करना होगा। इजरायल ने लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम के उस बयान का भी स्वागत किया है, जिसमें बेरूत को सैन्य गतिविधियों से मुक्त करने की बात कही गई थी।
सीजफायर पर संकट
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है, लेकिन लेबनान में जारी हमलों ने इस समझौते को कमजोर कर दिया है। इजरायल ने हाल के दिनों में सैन्य अभियान तेज किया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान मुद्दे का समाधान किए बिना सीजफायर लंबे समय तक टिकना मुश्किल होगा।
ट्रंप-नेतन्याहू की फोन पर बातचीत
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से बात कर लेबनान में हमले कम करने की अपील की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि ऐसा करने से ईरान के साथ चल रही वार्ता को सफल बनाने में मदद मिलेगी। बातचीत के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इजरायल फिलहाल हमले रोक सकता है, जिससे क्षेत्र में शांति की संभावना बढ़ेगी।
लेबनान की प्रतिक्रिया
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने घोषणा की है कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएगा। उन्होंने हालिया हमलों को "अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानून का उल्लंघन" बताया और कहा कि इससे शांति प्रयास कमजोर हो रहे हैं। सलाम ने सुरक्षा बलों को राजधानी बेरूत में नियंत्रण मजबूत करने और हथियारों को केवल वैध बलों तक सीमित करने के निर्देश दिए हैं।