Malviya Nagar Hotel Fire: रजाई-गद्दों ने बचाई 10 जानें, स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर चलाया रेस्क्यू अभियान

होटल के ठीक सामने रजाई-गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी इस घटना में लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए। जैसे ही उन्होंने देखा कि लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूद रहे हैं, उन्होंने तुरंत बड़ा फैसला लिया।;

Update: 2026-06-04 07:38 GMT

नई दिल्ली: Malviya Nagar Hotel Fire: मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते भयावह रूप ले लिया। घटना के समय होटल की पहली से लेकर पांचवीं मंजिल तक 40 से अधिक लोग फंसे हुए थे। धुआं तेजी से पूरे भवन में भर गया, जिससे बाहर निकलने के सभी रास्ते बंद हो गए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि कई लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदना पड़ा।

रजाई-गद्दों की दुकान मालिक बने ‘हीरो’

होटल के ठीक सामने रजाई-गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी इस घटना में लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आए। जैसे ही उन्होंने देखा कि लोग जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूद रहे हैं, उन्होंने तुरंत बड़ा फैसला लिया। रियाजुद्दीन ने बिना देर किए अपनी दुकान से करीब दो लाख रुपये मूल्य के गद्दे निकालकर सड़क पर बिछा दिए। उन्होंने गली और होटल के सामने पूरा क्षेत्र गद्दों से ढक दिया ताकि कूदने वाले लोगों को गंभीर चोट न लगे। उनके इस कदम ने कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।

गद्दों पर कूदकर बचीं जिंदगियां

रियाजुद्दीन द्वारा बिछाए गए गद्दों की वजह से लगभग 8 से 10 लोगों की जान बचाई जा सकी। इनमें एक महिला भी शामिल थी, जिसने तीसरी मंजिल से अपने छोटे बच्चे के साथ छलांग लगाई। दोनों को हल्की चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी तरह चौथी मंजिल पर फंसे एक दंपती ने पहले पाइप के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर वे सीधे गद्दों पर गिर पड़े और सुरक्षित बच गए।

पूर्व सिविल डिफेंस सदस्य ने दिखाई तत्परता 

रियाजुद्दीन मंसूरी ने बताया कि वह पहले सिविल डिफेंस से जुड़े रह चुके हैं, इसलिए उन्हें आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने का अनुभव था। उन्होंने बताया कि आग लगते ही उन्होंने खिड़की का शीशा तोड़कर रास्ता बनाया और तुरंत गद्दों को बाहर निकालकर बिछाना शुरू किया। उनका कहना है कि दुकान पूरी तरह खाली हो गई, लेकिन इंसानों की जान बचने का सुकून किसी भी नुकसान से बड़ा है। उनके अनुसार, उन्होंने 8 से 12 लोगों की जान बचाने में मदद की।


स्थानीय युवकों का साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

दूसरी ओर, कुछ स्थानीय युवकों ने भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के बचाव अभियान में हिस्सा लिया। धुएं और आग की तेज लपटों के बीच उन्होंने इमारत में घुसने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में असफल रहे। बाद में दीवार से सटे संकरे गलियारे के शटर को तोड़कर वे अंदर पहुंचे। अंदर का दृश्य बेहद भयावह था। कई लोग बेहोश पड़े थे और सांस लेना मुश्किल हो रहा था। युवकों ने चादरों की मदद से लोगों को लपेटकर बाहर खींचना शुरू किया और करीब 10 लोगों को सुरक्षित निकाला।

सीपीआर देकर बचाई कई जानें

रेस्क्यू के दौरान शोएब, वसीम और इकरार जैसे युवकों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया। उन्होंने कई लोगों को सीपीआर दिया, जिनकी सांसें कमजोर पड़ रही थीं। प्राथमिक राहत के बाद सभी घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। एक अचेत विदेशी नागरिक को दमकल कर्मियों की मदद से बाहर निकाला गया। उसे सीपीआर देते हुए लगभग 300 मीटर दूर मैक्स अस्पताल तक पहुंचाया गया।

हथौड़े से शीशे तोड़कर निकाले गए लोग 

लक्ष्मी नगर निवासी संजय गोयल और मालवीय नगर थाने के बीट अफसर मनोज ने भी राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई। दोनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर हथौड़े से इमारत के शीशे तोड़े और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इस अभियान में कुल 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें चार महिलाएं और कई विदेशी नागरिक शामिल थे।

फायर ब्रिगेड की देरी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड के रिस्पॉन्स टाइम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सूचना मिलने के लगभग 45 मिनट बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची। जबकि घटनास्थल फायर स्टेशन से मात्र डेढ़ किलोमीटर दूर था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार फायर ऑफिसर को फोन किया, लेकिन हर बार सिर्फ ‘पहुंच रहे हैं’ का आश्वासन मिलता रहा।

भीषण हादसे के बीच मानवता की मिसाल

इस दर्दनाक हादसे के बीच जहां एक तरफ भारी तबाही और जानमाल का नुकसान हुआ, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों की सूझबूझ और साहस ने कई जिंदगियां बचा लीं। रियाजुद्दीन मंसूरी जैसे लोगों ने साबित किया कि संकट की घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ी ताकत होती है।

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